हिमाचल के हर आदमी पर 50 हजार से ज्यादा का कर्ज- CAG रिपोर्ट

प्रदेश सरकार की कार्यशैली राज्य को कर्ज जाल की ओर धकेल रही है। यह बात कैग रिपोर्ट में कही गई है। इसके अनुसार राज्य द्वारा अगले सात साल में 62 प्रतिशत ऋण का भुगतान करना अपेक्षित है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के हर व्यक्ति पर वर्तमान में 57 हजार 642 रुपये का कर्ज है। यह आंकड़ा साल 2011-12 के 40 हजार 904 रुपये की अपेक्षा करीब सत्रह हजार रुपये ज्यादा है।

हालांकि, रिपोर्ट ने साफ किया है कि साल 2015-16 में केंद्र से मिलने वाली ग्रांट में वृद्धि की वजह से प्रदेश का वित्तीय घाटा कुछ कम जरूर हुआ है। कैग ने सरकार को सुझाव दिया है कि वह केंद्र पर वित्तीय कार्यों के लिए निर्भर रहने की बजाय अपने खर्चों में कटौती करे। शुक्रवार को विधानसभा में सरकार ने सीएजी की रिपोर्ट पेश की। इसके बाद प्रदेश के प्रधान महालेखाकार राम मोहन जौहरी ने प्रेस वार्ता कर रिपोर्ट पर विस्तृत जानकारी दी।

निवेश किया 3 हजार करोड़ मिला सिर्फ 3.68 फसदी रेवेन्यू
बताया कि केंद्र सरकार से राजस्व प्राप्ति बढ़ने से प्रदेश का घाटा साल 2014-15 की अपेक्षा साल 2015-16 में 4200 करोड़ से घटकर 2165 करोड़ हो गया है। भारत सरकार के निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार ने 364.57 करोड़ बजट के माध्यम से देने की बजाय सीधे कार्यदायी संस्थाओं को हस्तांतरित कर दिया। प्रदेश की कंपनियों और निगमों पर सरकार ने 31 मार्च, 2016 तक करीब 3 हजार करोड़ का निवेश किया।

लेकिन उससे महज 3.68 प्रतिशत राजस्व सरकार को अर्जित हुआ। खास बात यह है कि इन निगमों कंपनियों के संचालन के लिए बाजार से उठाए कर्ज पर सरकार 7.89 प्रतिशत की औसत से ब्याज का भुगतान कर रही है। जौहरी ने बताया कि साल 2010-11 से 2015-16 के बीच के करीब 7 हजार 904 करोड़ के व्यय को विधानसभा से मंजूरी मिलनी बाकी है।

ड़बड़झाला, कहां गए छात्रवृत्ति के 9.59 करोड़ रुपए
कैग रिपोर्ट में उच्च शिक्षा निदेशालय पर छात्रवृत्ति राशि के आवंटन में गड़बड़झाला करने का आरोप लगाया गया है। बताया गया कि साल 2014-15 के दौरान पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत मानदंड को पूरा नहीं किया गया। 9.59 करोड़ की छात्रवृत्ति को नियमों के खिलाफ ऐसे संस्थानों में पढ़ने वाले 2588 विद्यार्थियों को दिया गया।

जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से पाठ्यक्रम उपलब्ध करवाने के लिए प्राधिकृत नहीं थे। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत मान्यता प्राप्त संस्थानों में पोस्ट मैट्रिकुलेशन स्तर पर पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़ा वर्गों से संबंधित विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाती है।

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