‘महिला होने के कारण भारत में मेरी मां को जजों की पीठ में जगह नहीं मिली’

न्यूयॉर्क

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने दावा किया है कि भारत में उनकी मां को सिर्फ महिला होने की वजह से कभी जजों की बेंच में शामिल नहीं किया गया. उन्होंने कहा कहा कि उनकी मां भारत की पहली महिला जस्टिसों में शामिल थीं लेकिन महिला होने के कारण उन्हें कभी बेंच में जगह नहीं दी गई.

निक्की के पिता का नाम अजीत सिंह रंधावा और मां का नाम राज कौर रंधावा है. निक्की के माता पिता भारत से कनाडा आकर बस गए थे. फिर 1960 के दशक में वह अमेरिका आ गए थे.

निक्की ने कहा, यह बात मेरे दिल के बहुत करीब है. आप जानते हैं कि जब भारत में ज्यादा लोग शिक्षित नहीं हुआ करते थे, तब मेरी मां लॉ स्कूल गईं. उन्हें भारत की पहली महिला न्यायाधीशों में शामिल होने के लिए वास्तव में चुना गया था, लेकिन तब महिलाओं की स्थिति के कारण उन्हें पीठ में जगह नहीं दी गई. उनके लिए यह देखना कितना शानदार रहा होगा कि उनकी बेटी दक्षिण कैरोलिना की गवर्नर और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत बनीं.

उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय प्रवासियों की बेटी होने पर गर्व है. हेली के अनुसार अन्य देशों के लोगों पर उनके धर्म के कारण प्रतिबंध नहीं लगाए जाने चाहिए. निक्की ने प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा, मुझे भारतीय प्रवासियों की बेटी होने का गर्व है जिन्होंने मेरे भाइयों, मेरी बहन और मुझे हर रोज यह याद दिलाया कि हम सौभाग्यशाली हैं कि हम इस देश में रह रहे हैं.

उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि वैध आव्रजन अमेरिका का ताना बाना है. इसलिए उस नजरिए से यह बात मेरे दिल के करीब है और मैं इसका बहुत समर्थन करती हूं. ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध संबंधी शासकीय आदेश से जुड़े प्रश्न के जवाब में निक्की ने कहा कि धर्म के आधार पर कभी प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए. यह यात्रा प्रतिबंध धर्म के आधार पर नहीं लगाया गया यदि ऐसा होता तो दर्जनों ऐसे अन्य मुस्लिम बहुल देश हैं जो उन देशों की सूची में शामिल हो सकते थे जिन पर प्रतिबंध लगाया गया है.

उन्होंने कहा, हम अमेरिका के दरवाजे कभी बंद नहीं करेंगे लेकिन हमने जो किया, वह कुछ देर रूककर सोचने और यह कहने के लिए किया कि हम हमारे लोगों को किस तरह सुरक्षित रखने वाले हैं. निक्की ने कहा कि ट्रंप के यात्रा प्रतिबंध का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में किसी प्रकार का खतरा प्रवेश ना कर सके.

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