जीएसटी से जुड़े चारों बिल लोकसभा में पास, पीएम मोदी ने देशवासियों को दी बधाई

दिल्ली

लोकसभा में लंबी बहस के बाद ‘सबसे बड़ा आर्थिक सुधार’ कहे जाने वाला जीएसटी बिल आखिरकार सदन से पारित हो गया. जीएसटी से जुड़े चार बिलों सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेंसेशन जीएसटी बिलों को लोकसभा ने संशोधनों के बाद पास किया.

आगामी 31 मार्च को जीएसटी काउंसिल की बैठक होगी, इसमें जीएसटी के नियमों पर सहमति बनाई जाएगी. इसके बाद अप्रैल में किन टैक्स स्लैब में किस वस्तु को रखा जाएगा, उस पर फैसला लिया जाएगा. इनके लिए संसद की मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.

अब सरकार जीएसटी के इन बिलों को राज्यसभा में विचार-विमर्श के लिए पेश करेगी, क्योंकि सरकार ने जीएसटी बिल को मनी बिल के रूप में पेश किया, ऐसे में उसे राज्यसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं है.

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी बिल पास होने पर देशवासियों को बधाई दी, कहा- ‘नया साल, नया कानून, नया भारत.’

1 अप्रैल की डेडलाइन मिस करने के बाद सरकार 1 जुलाई से देशभर में समान टैक्स प्रणाली लागू करना चाहती है. जीएसटी का उद्देश्य पूरे देश में वस्तुओं और सेवाओं की दर को एक समान रखना है. वित्त मंत्री ने अरुण जेटली ने कहा कि अगर इस वक्त किसी वस्तु पर 10 प्रतिशत टैक्स लगता है तो हमारी कोशिश होगी कि उस पर जीएसटी की वह दर लगे, जो उसके करीब है. ऐसे महंगाई बढ़ने का कम खतरा रहेगा और वस्तुएं भी कुछ सस्ती हो सकती हैं.

लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने इसे गेमचेंजर बताया और बिल के कुछ प्रावधानों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जीएसटी के तहत खाने-पीने के जरूरी सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. यानी, पहला टैक्स स्लैब शून्य होगा जबकि दूसरा स्लैब- 5% और तीसरा स्लैब 12% और 18% का है.

जेटली ने कहा कि लग्जरी टैक्स स्लैब को दो भागों में बांटा गया है- टैक्स और सेस. इसमें टैक्स की दर 28 प्रतिशत होगी. सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेंसेशन जीएसटी बिलों को एक साथ सदन के पटल पर रखा था.

विपक्ष की ओर से जीएसटी पर कमान पूर्व पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के हाथ थी. मोइली ने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि बीजेपी ने जीएसटी लागू करने में देर कर देश को करीब 10 लाख करोड़ रुपये का चूना लगाया है. मोइली ने कहा कि यूपीए सरकार इसे अप्रैल 2010 से ही लागू करना चाहती थी. कांग्रेस के कई नेताओं ने जीएसटी को कांग्रेस का ब्रेन चाइल्ड बता बीजेपी को घेरने की कोशिश की.

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