सोलन फाइनेंसर किडनैपिंग केस में बड़ा खुलासा, जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

किराये के गुंडे लेकर फायरिंग के साथ खुद की किडनैपिंग की साजिश रचने वाले हिमाचल के सोलन के कारोबारी बाप-बेटा की कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों को गिरफ्तार भी कर लिया।

पुलिस ने मामले में कत्ल के प्रयास समेत साजिश रचने और आर्म्स एक्ट की संगीन धाराएं शिकायतकर्ता बाप बेटे पर लगाई हैं। पुलिस का दावा है कि करोड़ों के लेनदेन के मामले में ही यह साजिश रची गई है। दोनों बाप-बेटा की गिरफ्तारी की पुष्टि एसपी सोलन अंजुम आरा ने की है।

उन्होंने इस मामले की तफ्तीश कर रही पुलिस टीम की सराहना की है। सदर थाना प्रभारी रविंद्र कुमार ने कहा कि मामले में कारोबारी बाप बेटा के खिलाफ भी पुलिस ने भादसं की धारा 365, 384, 307, 120बी, 25  और 27 आम्र्स एक्ट के तहत मुकदमा दायर कर लिया है।

खुद बनाए झूठे सबूत, ऐसे खुला राज
फाइनेंसर ने खुद का ही अपहरण करवाकर इस वारदात को सच साबित करने के लिए करीब 6 किरदारों का सहारा लिया। इसके तहत एक पात्र से पहले फोन पर खुद को धमकियां दिलवाई और उस धमकी को रिकार्डिंग कर न्यायालय में पेश की।

इसके बाद चार किरदारों ने अपने घर से बेटे का और खुद का झूठा अपहरण करवाया। इतना ही नहीं सीसीटीवी फुटेज में कुछ नकाबपोश जब उनका अपहरण कर रहे थे उसे सुबूत के तौर पर पेश किया। साथ ही शहर के जानेमाने व्यापारी पर आरोप लगाया कि उसने उनकी किडनैपिंग 15 करोड़ के लेनदेन को लेकर करने की कोशिश की।

फोन डिटेल ने खोले राज
सोलन पुलिस ने गहनता से जांच कर फोन कॉल्स को भी खंगाला। इसमें कई संदिग्ध फोन नंबरों पर पुलिस की सूई घूमी। तब एक फोन नंबर पुलिस के हाथ लगा वो नंबर सोलन का निकला। इस किरदार को फाइनेंसर को धमकी देने का काम सौंपा था।

पकड़े जाने पर इसने यह कबूल किया कि उसे कारोबारियों ने ही धमकी देने का काम सौंपा था। बस फिर क्या था पुलिस की शक की सूई उसकी तरफ घूम गई और जांच की तो सभी परतें एक-एक करके खुलने लगीं।

इस तरह का मामला हुआ था दर्ज
26 जनवरी को अमित अग्रवाल ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि तीन नकाबपोश व्यक्तियों ने 25 जनवरी की रात को उसे और उसके पिता चंद्रपाल अग्रवाल को पिस्टल की नोक पर किडनैप किया। उन्हें गन प्वाइंट पर उनके कार्यालय ले गए।

जहां कुछ कागजात पर उनसे जबरन साइन करवाए। इसके बाद इन नकाबपोश व्यक्तियों ने उन पर हवाई फायर किया जिसमें अमित बाल-बाल बचा। इसके बाद नकाबपोश कुमारहट्टी के पास जंगल में उन्हें छोड़ भाग गए। इससे पहले चंद्रपाल ने 02 दिसंबर 2016 को एफआईआर दर्ज करवाई जिसमें कहा गया कि कोई उसे धमकी भरे फोन कर रहा है।

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