H-1B वीजा मामला, सुषमा ने कहा-‘चिंता की कोई बात नहीं’

केंद्र सरकार ने कहा है कि अमेरिका में काम कर रहे आईटी प्रफेशनल्स को एच-1बी वीजा पर नियंत्रण की कोशिशों पर फिलहाल चिंतित होने की जरूरत नहीं है और भारत सरकार इस मसले पर डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन से बातचीत कर रही है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को कहा कि प्रफेशनल्स से संबंधित एच1बी वीजा और एल1 वीजा को अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया गया है, लेकिन अभी इसे पारित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार अमेरिका से सर्वोच्च स्तर पर इस मामले को उठा रही है ताकि भारतीय लोगों और आईटी उद्योग पर इसका असर नहीं पड़े।

सुषमा ने बताया कि इस संबंध में भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर अमेरिका कांग्रेस के सदस्यों से मिल चुके हैं। इसलिए भारतीय प्रफेशनल्स को अपनी नौकरी को लेकर अभी चिंतित होने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि आईटी प्रफेशनल्स अमेरिका में किसी की नौकरी नहीं खा रहे बल्कि वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।’

राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए सुषमा ने कहा कि यह कहना सही नहीं होगा कि ट्रंप प्रशासन के सत्ता संभालने के बाद अमेरिकी नीतियों में बदलाव हो रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि ट्रंप के शासन संभालने के पहले भी एच-1बी वीजा को लेकर अमेरिकी नीतियों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं।

सुषमा ने कहा, ‘1990 में एच-1बी वीजा नीति पहली बार लाई गई और वीजा जारी करने की संख्या 65 हजार निर्धारित की गई। वर्ष 2000 में एनडीए सरकार के दौरान तीन सालों के लिए इसकी संख्या बढ़ाकर 1,95,000 कर दी गई थी। वर्ष 2004 में इसकी संख्या फिर से घटाकर 65 हजार कर दिया गया। ऐसे में हम कह सकते हैं कि ट्रंप प्रशासन के पहले भी अमेरिका की वीजा नीतियों में उतार-चढ़ाव आते रहे हैं।’ उन्होंने साथ ही बताया कि भारतीय प्रफेशनल्स की पत्नियों को मिलने वीजा सुविधा को अमेरिका ने अभीतक समाप्त नहीं किया हैा।

गैरकानूनी प्रवासियों के मुद्दे पर सुषमा ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने 271 व्यक्तियों की सूची भारत को सौंपी है जिसे प्रत्यर्पण के लिए चिन्हित किया गया है। लेकिन भारत ने इस बारे में साफ कर दिया है कि उन व्यक्तियों का उचित तरीके से सत्यापन करने के बाद ही प्रत्यर्पण की इजाजत दी जाएगी। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे भारतीयों के बारे में सरकार के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।’

विदेश मंत्री ने साथ ही साफ किया कि सरकार यह साबित होने के बाद ही कि विदेश जाने वाला व्यक्ति भारतीय ही है, ट्रैवल दस्तावेज जारी करती है। उन्होंने कहा, ‘हम भारतीय आईटी प्रफेशनल्स की नौकरियों को सुरक्षित करना सुनिश्चित करेंगे और इस मुद्दे को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाएंगे।’

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