ऑन-लाइन कस्टडी सर्टिफिकेट्स जारी करने वाला पहला राज्य बना हरियाणा

नवाचार की फैक्टरी बनी जिला कारागार भोंडसी जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में तकरीबन 16 महीने बिताने वाले साफ्टवेयर इंजीनियर अमित कुमार मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके बनाए गए साफ्टवेयर के कारण हरियाणा अदालत में फाईल की जाने वाली रिप्लाई की ई-वेटिंग प्रणाली शुरू के साथ आनलाईन कस्टडी सर्टिफिकेट्स सृजित कर वितरित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

बुधवार को प्रदेश ने ‘ई- वेटिंग’ और ‘ई-कस्टडी’ ऑनलाईन साफ्टवेयर की शुरूआत चंड़ीगढ़ स्थित महाधिवक्ता कार्यालय में की गई। ‘ई-कस्टडी’ साफ्टवेयर एक दहेज के लिए पत्नी की हत्या के झूठे मामले में बंदी रहे अमित मिश्रा की अवधारणा है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी अमित की इस प्रणाली को प्रथम चरण में भौंडसी जेल गुरुग्राम में पॉयलट परियोजना के रूप में लागू किया गया है। बाद में दूसरे चरण के दौरान इसे प्रदेश की अन्य जेलों में भी लागू किया जाएगा। अमित ने जेल से रिहा होने के उपरांत अपनी कम्पनी के माध्यम से इस साफ्टवेयर को विकसित किया, जिसे केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अनुमोदित और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायायल द्वारा स्वीकृत है। महाधिवक्ता कार्यालय द्वारा इस साफ्टवेयर को अन्य राज्यों में भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। यह साफ्टवेयवर रिप्लाई वेट्टिंग करने और सम्बंधित विभागों को कस्टडी सर्टिफिकेट्स वितरित करने में होने वाली अनावश्यक देरी में कमी लाने में न केवल सहायता करेगा बल्कि समय, यात्रा और धन की बचत भी करेगा। ‘ई-कस्टडी’ प्रणाली को जेल विभाग द्वारा इनवेडर टैक्नोलोजिस प्राईवेट लिमिटेड के सहयोग से डिजाइन किया गया है।

ऐसे काम करेगा ई-वेटिंग प्रणाली
‘ई- वेटिंग प्रणाली’ को महाधिवक्ता कार्यालय और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया। प्रथम चरण में इस प्रणाली को पुलिस और जेल विभागों में क्रियान्वित किया जाएगा। इसके सफल क्रियान्वयन के उपरांत इस नई ऑनलाईन प्रणाली को अन्य विभागों में क्रियान्वित किया जाएगा।

सम्बंधित अधिकारियों को बिना किसी देरी के समय पर रिप्लाई या ऑनलाईन शपथ-पत्र दायर करवाने में सहायता प्रदान करने हेतु इस ई-वेट्टिंग प्रणाली को डिजाइन किया गया। इसके क्रियान्वयन के उपरांत नोडल अधिकारी यूजर आईडी और पासवर्ड के साथ लॉग-ईन करके पीडीएफ फॉरमेट में वेट्टिंग के उपरांत अपनी रिप्लाई अपलोड करेंगे। इसे सम्बंधित लॉ अधिकारियों द्वारा वेट कर अदालत में फाईल किया जाएगा। इसे एसएमएस और ई-मेल अलर्ट के साथ भी जोड़ा जाएगा।

बचेगा समय और धन
हरियाणा के महाअधिवक्ता कार्यालय में प्रति वर्ष रिप्लाई वेट्ट कराने के लिए लगभग 21000 अधिकारी-कर्मचारी आते हैं। इस ऑनलाईन प्रणाली के क्रियान्वयन के उपरांत ऐसे आवागमन में 80 प्रतिशत तक कम हो जाएंगे। इससे 85 लाख रुपये से अधिक की राशि का वार्षिक खर्च कम होगा।

ऐसे कार्य करेगा ई-कस्टडी साफ्टवेयर
‘ई-कस्टडी’ प्रणाली को प्रदेश की विभिन्न जेलों से कस्टडी सर्टिफिकेट के ऑनलाईन वितरण के प्रबन्धन हेतु विकसित किया गया। क्रियान्वयन उपरांत जेल विभाग के कम से 50 कर्मचारी अन्य काम कर सकेंगे। वर्तमान में यह कर्मचारी मैन्यूवलि रूप से कस्टडी सर्टिफिकेट वितरित करने के कार्य में लगे हुए हैं। इससे जेल विभाग को खर्चे में 30 लाख रुपये की वार्षिक की बचत में सहायता मिलेगी।

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