उत्तराखंड में ‘काला जार’ से हड़कंप, आप भी जानिए

पौड़ी के मरीज में काला जार की पुष्टि होने से उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। मरीज को राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कर दवा की पहली डोज दी गई है। उत्तराखंड में सामान्य तौर पर काला जार बीमारी नहीं होती है। यह बेहद खतरनाक मानी जाती है और लापरवाही पर मरीज की जान भी जा सकती है।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बुधवार को बुखार से पीड़ित पौड़ी निवासी 53 वर्षीय प्रेम को भर्ती किया गया। उसे पिछले करीब छह माह से बुखार और शरीर में टूटन की शिकायत थी।

इससे पहले उसे एक माह पौड़ी और एक माह श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में भी भर्ती कराया गया, लेकिन बुखार ठीक नहीं हुआ। बुधवार को टीचिंग अस्पताल के फिजिशियन डॉ. मुकेश सुंदरियाल ने मरीज की जांच की। काला जार के संदिग्ध लक्षण मिलने पर उन्होंने बोन मेरो समेत अन्य जांचें करवाईं। जांच में मरीज में काला जार की पुष्टि हुई है।

प्रदेश में पहला मामला
इसके बाद मरीज को आईसीयू में भर्ती कर दवा की पहली डोज दी गई है। हालांकि, बाद में मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। डॉ. मुकेश सुंदरियाल ने बताया कि पीड़ित मरीज को दवा की 15 डोज देनी होती है। पहली डोज चढ़ाने के बाद मरीज की दवा की व्यवस्था पौड़ी में ही कर दी गई है।

उत्तराखंड में काला जार बीमारी का यह पहला मामला सामने आया है। काला जार के ज्यादातर मामले आमतौर पर इस्टर्न यूपी और बिहार की तरफ ही देखने को मिलते हैं। प्रदेश में पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

जानलेवा है काला जार
काला जार एक जानलेवा ज्वर है। इसमें मरीज को तेज बुखार बना रहता है। साथ ही डब्ल्यूबीसी व आरबीसी टूटने लगने लगते हैं। शरीर में खून की कमी हो जाती है। लापरवाही बरतने पर मरीज की मौत तक हो सकती है।

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