इजराइल में लड़ाई के गुर सीखेंगे भारतीय वायुसैनिक, चीन और PAK की ‘नो एंट्री’

पहली बार इजराइल जाकर अमेरिकी, फ़्रांसीसी और जर्मन योद्धाओं के साथ लड़ाई के गुर सीखेंगे भारतीय वायुसैनिक, चीन और पाकिस्तान को एंट्री नहींएयरफोर्स बेस पर खड़ा वायुसेना का विमान।
भारतीय वायुसेना इजराइल जाकर अपनी तरह का पहला युद्ध अभ्यास करने जा रही है। इस संयुक्त युद्ध अभ्यास में अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी की सेनाएं भी शामिल होंगी। खास बात ये है कि चीन और पाकिस्तान जैसे देश इसमें शामिल नहीं होंगे। इस संयुक्त एरियर ड्रिल को इतिहास के सबसे बड़े और जटिल संयुक्त युद्ध अभ्यास में से एक माना जा रहा है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार अभी इस संयुक्त युद्ध अभ्यास का ब्योरा सामने नहीं आया है लेकिन भारतीय रक्षा मंत्रालय के एक सूत्र ने अखबार को बताया कि भारतीय वायु सेना इस साल के अंत में ब्लू फ्लैग एक्सरसाइज में शामिल होने वाली है। भारत इजराइल में पहली बार ऐसे संयुक्त सैन्य अभ्यास लेगा जिसमें कई देश शामिल होंगे।

इजराइल भारत को सैन्य साजोसामान और हथियार आपूर्ति करने वाला प्रमुख देश है। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार इस सैन्य अभ्यास में सात देश हिस्सा लेंगे और करीब 100 युद्धक विमान इसमें हिस्सा लेंगे। ये साफ नहीं है कि भारत के कौन से युद्धक विमान शामिल होंगे। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इजराइल से भारत को मिले मानवरहित होरेन एरियल वेहिकल इसमें शामिल होंगे। इससे पहले भारतीय वायु सेना अमेरिका में रेड फ्लैग एक्सरसाइज में हिस्सा ले चुकी है। भारतीय सेना ने मई 2016 में अलास्का में संयुक्त युद्ध अभ्यास किया था जिसमें भारत के चार सुखोई 30 एमकेआई और चार जगुआर और दो आईएल 78 मिड एयर टैंकर शामिल हुए थे।

इसी साल फरवरी में भारत ने इजराइल के संग मिसाइल सौदा किया। भारत और इजराइल मिलकर मध्यम रेंज की सतह से हवा में मार करने वाली (एमआर-एसएएम) मिसाइल बनाएंगे। नरेंद्र मोद सरकार द्वारा किए गए 17 हजार करोड़ रुपये के इस सौदे के बाद मिलने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल भारतीय थल सेना करेगी। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और इजराइली एयरक्राफ्ट इंडस्ट्री (आइएआइ) दोनों साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे।  इस सौदे को पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा संबंधी कैबिनेट कमेटी की एक बैठक में मंजूरी दी गई थी।

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