हिमाचल प्रदेश में बढ़ते प्रदूषण से HC चिंतित

शिमला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले के बद्दी औद्योगिक क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए पर्यावरण, विज्ञान एवं तकनीकी विभाग के प्रधान सचिव को 2 सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। कोर्ट ने मामले से जुड़े अन्य पक्षकारों को अपनी रिपोर्ट पर्यावरण सचिव को सौंपने के आदेश भी दिए ताकि वे संयुक्त रूप से अपनी रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष पेश कर सकें। कोर्ट ने उन्हें बद्दी में बिगड़ते पर्यावरण प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए संबंधित विभागों से चर्चा करने के आदेश दिए। ये आदेश मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किए।

गंदे पानी का सही से उपचार न होने के कारण बढ़ रही प्रदूषण की मात्रा
मामले के अनुसार सोलन जिला के बद्दी में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का सही से उपचार न होने के कारण क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है। करीब 60 करोड़ रुपए की लागत से इस क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमैंट प्लांट स्थापित किया है। इसकी प्रस्तावित क्षमता 250 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का उपचार करने की है जबकि इसमें 110 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का ही उपचार किया जा रहा है। ट्रीटमैंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किए जाने की बात तब सामने आई जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने यह बात जिला परिषद की त्रैमासिक बैठक में बताई थी।

मामले पर अगली सुनवाई 13 अप्रैल
जिला परिषद अध्यक्षधर्मपाल चौहान ने बोर्ड के अधिकारियों से मीटिंग के दौरान पूछा था कि बद्दी, बरोटीवाला व नालागढ़ क्षेत्र में कितने कचरा उपचार केंद्र खोले गए हैं और क्या वे क्षमता के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या बोर्ड ने कभी ट्रक आप्रेटर यूनियन के पास सरसा नदी से पानी के सैम्पल जांच के लिए और सैंपल फेल पाए गए तो बोर्ड ने नजदीकी औद्योगिक इकाइयों पर क्या कार्रवाई अमल में लाई। उन्होंने यह आरोप लगाया कि क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी से प्रदूषित हो रहे हैं जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। मामले पर अगली सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।

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