जेलों को सुधारने में जुटी मोदी सरकार, लाई नया सॉफ्टवेयर

जेल सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही मोदी सरकार ने ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर डिवेलप करने का मन बना लिया है। देशभर में कैदियों की हालत को ध्यान में रखते हुए कानून मंत्रालय ने राज्यों के सेक्रटरीज को ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर पर स्विच करने के लिए पत्र लिखा है।

इस सॉफ्टवेयर में देशभर के कैदियों का ब्यौरा है, जिसमें उनकी सजा से जुड़ी समयसीमाओं का भी लेखाजोखा है। सरकार ने इस बात को लेकर प्रतिबद्धता जताई है कि हर कैदी के साथ निष्पक्ष ट्रायल हो और उसे आवश्यकता से ज्यादा जेल में वक्त न गुजारना पड़े।

देशभर के तकरीबन 4.18 लाख कैदियों में 67 प्रतिशत अंडरट्रायल्स हैं। कुछ तो चोरी जैसे छोटे अपराधों में लिप्त हैं। इसके अलावा 1.28 लाख कैदी जेल किसी न किसी अपराध में देषी पाए गए हैं व अभी जेल में हैं। राज्यों को लगातार याद दिलाने के बावजूद केंद्र सरकार को अब तक कोई भी आंकड़ा प्राप्त नहीं हुआ है। महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, उड़ीसा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड, गोवा व उत्तर पूर्वी राज्यों के चीफ सेक्रटरीज से कानून मंत्रालय ने सॉफ्टवेयर पर काम सुनिश्चित करने को लेकर लिखा है।

गृह मंत्रालय भी कानून मंत्रालय के साथ मिलकर जेल रिफॉर्म्स को लागू करने के लिए जुट गया है। जहां सबसे ज्यादा कैदी अंडरट्रायल्स हैं, उनमें गुजरात, झारखंड, हरियाणा, उड़ीसा, गोवा, नागालैंड और मणिपुर प्रमुख हैं।

जहां, 20 राज्य और यूनियन टेरिटरीज इस सॉफ्टवेयर पर पहले से ही शिफ्ट हो चुके हैं, वहीं कुछ ऐसे हैं, जहां अभी यह ई-प्रिजन सॉफ्टवेयर लागू नहीं किया गया है। इस सॉफ्टवेयर की पहली परीक्षा तिहाड़ जेल में हुई थी। अब अन्य राज्यों में इस पर काम करने की पहल की जा रही है।

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