फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘PAK ने आतंक से लड़ाई के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए’

फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने कहा कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है. उन्होंने कहा कि चीन को भी आतंकवाद के बारे में अपना नजरिया साफ करना चाहिए.

सरकोजी ने कहा कि वह गठजोड़ में विश्वास करते हैं और हमेशा से यह चाहते थे कि भारत और फ्रांस के बीच एक सामरिक गठजोड़ कायम हो. उन्होंने कहा, ‘भारत और पाकिस्तान में से मुझे चुनना हो तो मैं हमेशा कहता रहा हूं कि भारत को प्राथमिकता देनी चाहिए. भारत एक लोकतंत्र है और लोकतंत्र में उन सभी लोगों को न्याय के कठघरे तक लाना चाहिए जो इसकी जमीन पर आतंकी हमले करते हैं. मैं चाहता हूं कि भारत और पाकिस्तान के बीच अच्छे रिश्ते हों. इसी तरह चीन को भी आतंकवाद पर एक नजरिया अपनाना होगा. चीन से भारत जितना ही नाराज होता है उससे उसे उतनी ही बात करने की कोशि‍श करनी चाहिए. आखिरकार जब हम साथ होंगे तभी आतंक के खिलाफ लड़ाई लड़ पाएंगे. मुंबई में भयानक आतंकी हमला हुआ, हम भी पेरिस में आतंक की भयावहता देख चुके हैं. हम आतंकियों से सीधी लड़ाई लड़गें और उन्हें जीतने नहीं देंगे.’

बुर्के में क्यों रहे औरत
सरकोजी ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा है कि ब्रेक्जिट कोई अच्छी खबर है. उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय संस्कृति पसंद है और यहां का खाना काफी अच्छा होता है. उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी संस्कृति का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘फ्रांस एक सेकुलर देश है. हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चों को किसी धर्म से पहचाना जाए. हमारे यहां मर्दों और औरतों को पूरी तरह से बराबरी मिली है. किसी औरत के शरीर का उसकी संपूर्णता में सम्मान किया जाना चाहिए. लड़कियों को अपना पति और कपड़े चुनने की आजादी होनी चाहिए. मैं यह नहीं समझ पाता कि किसी युवती को बुर्के में क्यों रखा जाए.’

यूरोप सबसे क्रूर महाद्वीप
उन्होंने कहा कि अब दुनिया का सबसे अस्थ‍िर और क्रूर महाद्वीप अफ्रीका नहीं बल्कि यूरोप रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप में 60 लाख लोगों का नरसंहार किया गया था. सरकोजी ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी किया 100 फीसदी पैसन के साथ किया. उन्होंने कहा कि जब वह स्कूल में थे तब भी हमेशा 100 फीसदी प्रयास करना चाहते थे. उन्होंने जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक ऐसी मजबूत महिला हैं जिन्होंने जर्मनी को एक सम्मान दिलाया है.

उन्होंने कहा, ‘आज की दुनिया बहुध्रुवीय हो गई है. मैं जितना अमेरिका को पसंद करता हूं, उतना भारत को भी पसंद करता हूं.’

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