एक शख्स ने जयललिता का बेटा होने का किया दावा, कोर्ट ने कहा- जेल भेज दूंगा

चेन्नई

मद्रास हाईकोर्ट ने खुद को तमिलनाडु की पूर्व सीएम जयललिता का गोपनीय बेटा बताने वाले एक शख्स को फटकार लगाई. हाईकोर्ट ने उस शख्स द्वारा जमा कराये गए दस्तावेजों की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाये.

जस्टिस आर महादेवन ने कहा, ‘‘मैं इस शख्स को सीधे जेल भेज सकता हूं. मैं पुलिस अधिकारियों से कहूंगा कि उसे सीधे जेल में ले जायें.’’ जस्टिस ने उस शख्स को शनिवार को पुलिस कमिश्नर के सामने खुद पेश होकर उन्हें जांच के लिये मूल दस्तावेज सौंपने को कहा.

जे कृष्णामूर्ति नाम के इस शख्स ने कोर्ट में कहा कि वह जयललिता और तेलगु अभिनेता शोभन बाबू की संतान है. उसने गोद लेने के दस्तावेज समेत कुछ कागजात भी कोर्ट के समक्ष रखे. उसने खुद को जयललिता का बेटा घोषित करने में मदद की मांग की. उसने कहा कि बेटे के तौर पर जयललिता के पोएश गार्डन स्थित घर समेत उनकी संपत्तियों पर उसका हक है.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से मांग की कि वह राज्य के डीजीपी को उसे सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दें. क्योंकि उसे जयललिता की सहयोगी और अन्नाद्रमुक महासचिव वी के शशिकला के परिवार से खतरे की आशंका है. यह याचिका हाईकोर्ट के पंजीयन कार्यालय में एक हफ्ते पहले दायर की गयी थी और यह स्वीकार करने योग्य है या नहीं इसे गुणदोष के आधार पर देखा जाना था. जस्टिस ने कहा कि याचिकाकर्ता ने मनगढ़ंत दस्तावेज बनाये हैं.

जस्टिस ने कहा, ‘‘..अगर एलकेजी के छात्र के समक्ष भी ये दस्तावेज रख दिये जायें तो वह कहेगा कि यह मनगढ़ंत दस्तावेज हैं. आपने सार्वजनिक क्षेत्र में मौजूद एक तस्वीर लगा दी. आपको क्या लगता है कोई भी अंदर आयेगा और जनहित याचिका की कार्यवाही शुरू हो जायेगी.’’ जस्टिस ने कहा, ‘‘कोर्ट से खिलवाड़ मत करो.’’ इसके बाद उन्होंने सहायक लोक अभियोजक इमलियास को इन दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करने को कहा.

यह दस्तावेज पुलिस कमिश्नर के सामने पेश किये जायेंगे. ‘‘कमिश्नर को ही इन दस्तावेजों की सत्यता परखने दीजिये.’’ याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसका जन्म 1985 में हुआ था और एक साल बाद इरोड स्थित वसंतमनि परिवार को उसे गोद दे दिया गया. वसंतमणि 1980 के दशक में पूर्व मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन के यहां कथित तौर पर काम करते थे. याचिकाकर्ता के मुताबिक गोद के दस्तावेज पर पीछे की तरफ जयललिता, शोभन बाबू और वसंतमनि की तस्वीर और दस्तखत हैं. इस दस्तावेज में गवाह के तौर पर एम जी रामचंद्रन के दस्तखत हैं.

इस संदर्भ में जस्टिस ने कहा कि जिस समय का यह कथित खत बताया जा रहा है उस समय दिवंगत मुख्यमंत्री एम जी रामचंद्रन अपना हाथ हिलाने की हालत में भी नहीं थे. जस्टिस ने कहा, ‘‘दस्तावेज में लेकिन दिखाया जा रहा है कि उन्होंने दस्तखत किये.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस याचिकाकर्ता ने मनगढ़ंत दस्तावेज बनाये…’’

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