जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के सात जजों से 14 करोड़ का हर्जाना मांगा

कोलकाता

पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक ने आज अवमानना के मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सीएस कर्णन को उच्चतम न्यायालय द्वारा 31 मार्च को उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जारी जमानती वारंट सौंपा.

हालांकि, डीजीपी सुरजीत कार पुरकायस्थ द्वारा न्यायमूर्ति कर्णन को उनके आवास सौंपे गये वारंट को न्यायाधीश ने ठुकरा दिया.

शीर्ष अदालत ने 10 मार्च को भारत के न्यायपालिका के इतिहास के इस अभूतपूर्व आदेश में यह वारंट जारी किया था.

कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार और डीआईजी (सीआईडी) राजेश कुमार के साथ डीजीपी न्यू टाउन एरिया स्थित न्यायमूर्ति कर्णन के आवास पर पहुंचे और उन्हें वारंट सौंपा.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, डीजीपी ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ जारी जमानती वारंट आज सुबह न्यू टाउन स्थित उनके आवास पर उन्हें सौंप दिया.

जब तीनों पुलिस अधिकारी न्यायमूर्ति के आवास पर पहुंचे, उस वक्त वहां बडी संख्या में पुलिस बल तैनात था.

स्वत: संज्ञान से अवमानना कार्यवाही शुरू करने और जमानती वारंट जारी करने वाली प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ को लिखे पत्र में न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा कि वह वारंट को ठुकराते हैं.

न्यायमूर्ति कर्णन ने पत्र में न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा कि 10 मार्च 2017 को स्वत: संज्ञान की अवमानना कार्यवाही के तहत आपके जमानती आदेश को लेकर आज कलकत्ता उच्च न्यायालय सर्किल के शीर्ष पुलिस अधिकारी 31 मार्च 2017 को सुबह साढे दस बजे के लिए जमानती वारंट निष्पादित करने हेतु मेरे आवास पर आए थे.

न्यायमूर्ति कर्णन ने कहा, मैंने वैध कारण बताकर इसे अस्वीकार कर दिया. इस बीच न्यायमूर्ति कर्णन ने उनका न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य रोकने पर उच्चतम न्यायालय के सात न्यायाधीशों से 14 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा है.

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