अगर ऐसा हुआ तो, खाली हो जाएगा जापान….

क्या जापान में ‘सेक्स संकट’ का दायरा भयावह रूप ले रहा है? क्या एक दिन ऐसा आएगा जब जापान खाली हो जाएगा? जापानी लोगों को ‘ज़्यादा सेक्स’ करने की ज़रूरत क्यों बताई जा रही है. तोहोकु यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इन्हीं निष्कर्षों के बाद डूम्ज़डे क्लॉक (प्रलय के दिन का अंदाजा लगाना) बनाई है.

इसके मुताबिक़ जापान में वर्तमान ‘सेक्स संकट’ का मतलब है कि 16 अगस्त 3766 को जापान में केवल एक शख्स बच जाएगा. यह अनुमान देश में घटती प्रजनन दर और बूढ़ों की आबादी पर आधारित है. ब्रिटेन में भी 1920 के दशक की पीढ़ी की तुलना में लाखों लोगों की सेक्स में दिलचस्पी कम हुई है.

जापान फैमिली प्लानिंग असोसिएशन के सर्वे में बताया गया है कि 16 से 24 साल की उम्र वाली 45 फ़ीसदी जापानी महिलाओं को यौन संबंध में कोई दिलचस्पी नहीं है. एक तिहाई से ज़्यादा पुरुष भी इस बात से सहमत हैं.

सेक्स के बदले काम को तरजीह देती हैं जापानी महिलाएं
तोहोकु यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि स्थिति काफी गंभीर है. शोधकर्ताओं ने बताया कि वह वक़्त भी आएगा जब जापान बिल्कुल अकेला महसूस करेगा क्योंकि तब यहां सिर्फ एक शख्स होगा.

ब्रिटेन में भी सेक्स को बढ़ावा देने के लिए डेटिंग ऐप्स की शुरुआत की गई फिर भी ब्रिटिश युवा कम सेक्स कर रहे हैं. सेक्स में कमी की एक बड़ी वजह ज़्यादा वक़्त इंटरनेट पर खर्च करना है.

जापानी काम पर ज़्यादा वक़्त खर्च करते हैं. काम में इस कदर थक जाते हैं कि उनके लिए सेक्स कोई प्राथमिकता नहीं रह जाती.
औसतन जापानी पुरुष एक हफ़्ते में 80 घंटे काम करते हैं.

ज़्यादातर जापानी महिलाएं महसूस करती हैं कि उन्हें करियर और गृहस्थी के बीच किसी एक को चुनना होता है और कइयों की प्राथमिकता परिवार बसाने से ज़्यादा काम है.

यदि लोग कहते हैं कि युवाओं को सेक्स, ड्रग्स और रॉक ज़्यादा आकर्षित करते हैं तो यह जापानी युवाओं के लिए सच नहीं है.

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