प्रॉपर्टी का रेट डाउन, लेकिन खरीदने में न करें जल्दबाजी

प्रॉपर्टी की कीमत कम हो रही है, होम लोन सस्ते हो गए हैं और शेयर बाजार में तेजी का माहौल है। तो क्या यह घर खरीदने का सही समय है? जानकारों का कहना है कि अभी घर खरीदने की जल्दबाजी करना ठीक नहीं होगा क्योंकि डिमांड बढ़ने में अनुमान से कहीं ज्यादा वक्त लग सकता है। वहीं, रियल एस्टेट अट्रैक्टिव एसेट क्लास भी नहीं दिख रहा है।

ऐसा कभी-कभार ही हुआ है, जब शेयर बाजार में तेजी हो और रियल एस्टेट का प्रदर्शन खराब रहा हो। इसलिए शेयर बाजार की हालिया तेजी को देखते हुए लोगों को लग रहा है कि इस बार भी रियल एस्टेट मार्केट में सुधार होगा। हालांकि, अभी बीजेपी केंद्र और कई राज्यों में सत्ता में है, इसलिए रियल एस्टेट इंडस्ट्री की खातिर हालात कुछ अलग दिख रहे हैं।

टीआरयू रियल्टी टेक्नॉलजी के फाउंडर और रियल एस्टेट कंपनी कोल्टे पाटील के पूर्व सीईओ सुजय कालेले ने बताया, ‘पिछली सरकारों के मुकाबले इस सरकार की सोच अलग है। यह सरकार स्टार सिटी बनाने में यकीन नहीं रखती ना ही वह स्पेशल इकनॉमिक जोन को रियल एस्टेट मार्केट में बदलने देना चाहती है। पहले इस वजह से अक्सर स्पेशल इकनॉमिक जोन के आसपास के इलाकों में घरों के दाम बढ़ जाते थे। सरकार हाउसिंग को किफायती बनाए रखना चाहती है। उसका ध्यान सस्ते घरों की सप्लाई बढ़ाने पर है।’

देश में 6 करोड़ अफोर्डेबल हाउसिंग का निर्माण चल रहा है। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड के हालिया डेटा के मुताबिक, 20 से 50 लाख के घर यानी अफोर्डेबल हाउसिंग ऐसा सेगमेंट है, जिसमें 2016 में सबसे अधिक घर लॉन्च हुए। पिछले साल इस सेगमेंट में लॉन्च 22 पर्सेंट बढ़ा। वहीं, मिड और हाई ऐंड सेगमेंट में लॉन्च में क्रमश: 12 पर्सेंट और 49 पर्सेंट की गिरावट आई।

नाइट फ्रैंक के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर गुलाम जिया ने बताया, ‘इंडस्ट्री के रूल्स बदल रहे हैं। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी ऐक्ट के लागू होने की उम्मीद है। उसके बाद बिल्डरों का वह जलवा नहीं रह जाएगा, जो पहले हुआ करता था। पिछले बजट में जिस फ़ाइनैंस बिल का प्रस्ताव किया गया था, उसमें भी एक से अधिक घर पर टैक्स इंसेंटिव को वापस ले लिया गया है। इससे इंडस्ट्री में मांग पर बुरा असर पड़ सकता है।’

उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक तौर पर देखा गया है कि शेयर बाजार के साथ रियल एस्टेट के दाम में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इस बार ऐसा होने पर मुझे शक है। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी ऐक्ट को इस साल मई से लागू किया जा सकता है। इसमें बिल्डरों के लिए कड़ी शर्तें रखी गई हैं। फ्लोर स्पेस इंडेक्स में तेज बढ़ोतरी से भी यह संकेत मिलता है कि सरकार घरों की सप्लाई बढ़ाकर दाम को कंट्रोल में रखना चाहती है। 2014 से पहले एफएसआई 1 के करीब था, जिसमें अब काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। मिसाल के लिए, पुणे के एक हालिया डिवेलपमेंट प्लान में शहर के लिए एफएसआई को पहले के 0.9 से बढ़ाकर 3 कर दिया गया। वहीं, पिंपरी चिंचवाड़ में इसे पहले के 0.9 से बढ़ाकर 2.4 कर दिया गया।

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