HC जजों की नियुक्ति का रास्ता साफ, SC कॉलेजियम ने दी मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने खुद के अंतरर्विरोधों और केंद्र के साथ गंभीर मतभेद को समाप्त करते हुए जजों की नियुक्ति से जुड़े मेमोरेंडम ऑफ प्रसीजर (एमओपी) को आखिरी रूप दे दिया है। यह मामला न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच कलह का कारण रहा है। चीफ जस्टिस जे एस खेहर की अध्यक्षता वाला कलीजिअम एमओपी में नैशनल सिक्यॉरिटी क्लॉज को जोड़ने पर सहमत हो गया है। केंद्र सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की पात्रता में इसे शामिल किए जाने पर अड़ा था। इस कलीजिअम के अन्य सदस्यों में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस जे चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर शामिल हैं।

कलीजिअम ने इसके अतिरिक्त सुप्रीम कोर्ट और प्रत्येक हाई कोर्ट में सेक्रटेरिएट्स के गठन को लेकर भी अपना विरोध छोड़ दिया है। इसका गठन जजों के डेटाबेस को बनाए रखने और जजों की नियुक्ति में कलीजिअम की सहायता करने के लिए किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में एक सेक्रटेरिएट के गठन पर सर्वसम्मति बन गई है।

हाई कोर्ट में जल्द भरी जाएंगी रिक्तियां
कलीजिअम और सरकार के बीच के मतभेद के कारण रिक्तियां भर नहीं पाई थीं। एमओपी पर मुहर लग जाने के बाद इसे केंद्र की मंजूरी और इसे अंगीकार करने के लिए इसे भेजा जाएगा। इससे हाई कोर्ट में रिक्तियां भरने की उम्मीद बढ़ा दी है, जिसमें अभी भी इसकी क्षमता से 60 फीसदी से भी नीचे कर्मचारी हैं।

कई हाई कोर्ट में जजों की कमी के कारण कोर्ट रूम बंद पड़े हैं। जिससे केस का निष्पादन जल्द नहीं हो पा रहा है। एक सूत्र ने बताया, ‘नैशनल सिक्यॉरिटी क्लॉज और सेक्रटेरिएट के गठन के अलावा कोई और ऐसा कठिन पॉइंट नहीं है जिसके प्रस्ताव की जरूरत है।’

सुप्रीम कोर्ट के कलीजिअम ने इस दौरान 7 बैठकें की हैं और सर्वसम्मति से एमओपी को हरी झंडी दी है। जस्टिस खेहर की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने अक्टूबर 2015 एनजेएसी (नैशनल जूडिशल अपॉइंटमेंट कमिशन) पर रोक लगा दी थी और दिसंबर 2015 में केंद्र को चीफ जस्टिस के साथ सलाह-मशविरा कर नया एमओपी तैयार करने कहा था।

चीफ जस्टिस को कलीजिअम के अन्य सदस्यों के विचार के अनुरूप फैसला लेना था। पिछले एक साल से एमोपी का ड्राफ्ट कलीजिअम और केंद्र के बीच फंसा हुआ था। दोनों में से कोई भी पक्ष अपने रुख से टस से मस होने को तैयार नहीं था। हालांकि, खेहर के चीफ जस्टिस बनने के बाद से स्थितियां बदलीं।

Share With:
Rate This Article