INS सांध्यक पर युवा नाविकों ने ये क्या किया…

भारतीय नौसेना ने आईएनएस सांध्यक पर तैनात कुछ युवा नाविकों की ओर से कथित तौर पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों का आदेश नहीं मानने के मामले में बोर्ड ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं। नौसेना सूत्रों ने बताया कि आदेश नहीं मानने की घटना के बाद तीन-चार कनिष्ठ नाविकों, जिनके पास ढाई साल तक का अनुभव है, को पोत से चलता कर दिया गया। एक बयान में नौसेना ने कहा कि बंगाल की खाड़ी में पारादीप तट के पास अपनी नियमित तैनाती के वक्त आईएनएस सांध्यक ने कल कुछ युवा नाविकों की ओर से अपने वरिष्ठ अधिकारियों का आदेश नहीं मानने की घटना की सूचना दी और इस मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। बयान के मुताबिक, ‘‘भारतीय सशस्त्र बल अनुशासन का बेहद उच्च स्तर बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं ।

घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त करने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’  नौसेना ने यह भी कहा है कि पोत को निर्देश दिया गया है कि वह घटना में शामिल कर्मियों को वहां से हटाए ताकि उसे सौंपी गई जिम्मेदारी पूरी करने से पहले जांच में प्रगति हो सके। यदि दोषी पाए गए तो आरोपी नाविकों को नौसेना कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा ।

जानकारी के मुताबिक ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि आईएनएस सांध्यक पर तैनात एक युवा नाविक को जब सावधान मुद्रा में खड़े रहने का आदेश दिया गया तो वह कथित तौर पर आदेश का पालन करने के बजाए आराम से खड़ा रहा। इस बात से गुस्साए वरिष्ठ अफसर ने नाविक को दोबारा आदेश दिया और जब तब भी वह नहीं माना तो अधिकारी ने कथित तौर पर जबरन उसे सावधान मुद्रा में लाने की कोशिश की। अधिकारी के ऐसा करते ही नाविक ने उसे थप्पड़ मार दिया जिसके बाद युवा नाविक के कुछ साथियों ने भी मिलकर अफसर की पीट दिया।

लड़ाई इस हद तक बढ़ गई थी कि युवा नाविकों आईएनएस सांध्यक से हेलीकॉप्टर के जरिए एयरलिफ्ट कर वहां से निकालना पड़ा। नेवी ने कहा है कि इस घटना को “बगावत” नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें कुछ लोगों के बीच ही झड़प हुई थी। वहीं इस घटना के बाद आईएनएस सांध्यक ने अपने ऑपरेशन्स दोबारा शुरु कर दिए हैं। इस्टर्न नेवल कमांड के अंडर इस जहाज को 2001 में तैनात किया गया था।

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