लखनऊ एनकाउंटर: मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद और उसका साथी गिरफ्तार

लखनऊ

ठाकुरगंज एनकाउंटर मामले में एटीएस ने इसके मास्टरमाइंड गौस मोहम्मद खान उर्फ जीएम खान और उसके साथी अजहर को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया है. अजहर का नाम संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह की डायरी और मैप में भी सामने आया था.

बुधवार को यूपी से दो और मध्यप्रदेश से 3 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. बता दें, मंगलवार की रात संदिग्ध आतंकी सैफुल्लाह को यूपी एटीएस ने लखनऊ के ठाकुरगंज इलाके में 11 घंटे चले एनकाउंटर के बाद मार गिराया था. इस घटना में ‘खुरासान’ मॉड्यूल का नाम सामने आया था, जो आईएसआईएस से प्रेरित बताया गया.

यूपी के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर दलजीत सिंह चौधरी ने बताया, ”गौस 1978 में एयरफोर्स में था. 1993 में उसने नौकरी छोड़ दी थी. गौस ने अपना नाम करण खत्री रखा था और कानपुर के जाजमऊ में रहता था.”

उन्होंने बताया, ”जीएम खान काफी समय से इस काम में लगा था. वो पुराना टेक्न‍िकल मैन है. इसी से वो पुराने कनेक्शन स्थापित करता था. इस पूरे मॉड्यूल को प्रेरणा देना, लिटरेचर उपलब्ध कराना, आतंकी दिशा में ले जाने में जीएम का ही हाथ था.

उन्होंने बताया, ”वहीं, दूसरा संदिग्ध अजहर इटावा का रहने वाला है, जो हथियारों का सप्लायर था. अब बाकी चीजें इन्वेस्टिगेशन में साफ होंगी.”

उधर गौस के बेटे अब्दुल कादिल ने बताया, ”मेरे और मेरे भाई की लखनऊ में दुकान है. हमें इस घटना के बारे में बिल्कुल जानकारी नहीं है. मंगलवार की रात 12.30 हम अपने गांव बछरावां में पिता के साथ थे. उसके बाद से वे गायब थे. पिता की गिरफ्तारी की बात न्यूज देखकर पता चली, जि‍सके बाद हम वापस कानपुर लौट आए.”

”मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि ऐसा भी कुछ हो सकता है. अगर मेरे पिता इसमें शामिल हैं तो गिरफ्तारी सही है.”

कादिल ने आगे बताया, ”एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद पिता जी कुछ भी नहीं करते थे. इसके बावजूद हम लोगों से अलग करीब 2 साल से लखनऊ में रहते थे. इसी बात को लेकर घर में अनबन भी होती थी.”

”हमें आज तक नहीं पता कि लखनऊ में वो कहां रहते थे. इस्लामी किताबें पढ़ने का उन्हें बहुत शौक था.”

एनकाउंटर के दौरान मारे गए आतंकी सैफुल्लाह के पिता मोहम्मद सरताज ने कहा है कि वो भी अपने बेटे से प्रेम करते थे, उसके गुमराह होने का पता ही नहीं चला. घर में सैफुल के नाम से पुकारे जाने वाले इस संदिग्ध आतंकी के पिता ने राजनाथ सिंह द्वारा उन्हें संसद में याद किए जाने पर कहा- उन्होंने हम जैसे छोटे आदमी को याद किया, इसके लिए हम शुक्रगुजार हैं. सरताज ने कहा- सरकार को वॉट्सऐप जैसी चीजों पर फौरन रोक लगानी चाहिए.

सैफुल्लाह के पिता ने आगे कहा, ”आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता. फिर चाहे वो हिंदू परिवार से हो या मुस्लिम परिवार से. बचपन से नजर रखें तो बच्चों बचाया जा सकता है. उसके पास जो मोबाइल था, उसमें स्क्रीन नहीं थी. वो सिर्फ बटन दबाता रहता था. एक बात मैं जरूर कहना चाहता हूं कि मोबाइल पर वॉट्सऐप वगैरह की वजह से बच्चे गलत संगत में पढ़ जाते हैं. मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि वो इस तरह की चीजों पर फौरन रोक लगाए.”

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