सैफुल्ला के पिता ने कहा- बेटे का शव नहीं चाहिए, उसने वतन से गद्दारी की

लखनऊ

लखनऊ के ठाकुरगंज में हुए एनकाउंटर में मारे गए आतंकी सैफुल्ला के परिजनों ने उसका शव लेने से इनकार कर दिया है. उसके पिता सरताज ने कहा कि जो देश का नहीं हो सका वह हमारा क्या होगा. उन्हें लखनऊ ले जाने के लिए कानपुर पहुंची पुलिस टीम चुपचाप खाली हाथ वापस लौट गई.

लखनऊ में 11 घंटे चले ऑपरेशन के बाद पुलिस ने सैफुल्ला के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. इसके बाद पुलिस की एक टीम को कानपुर से उसके पिता सरताज को लाने के लिए भेजा गया.

यहां, दोपहर टीटा जाजमऊ स्थित सैफुल्ला के घर पहुंची पुलिस टीम उसके पिता सरताज से मिली. पुलिस ने उसे घटना की जानकारी देने के बाद अपने साथ लखनऊ चलने को कहा.

इस पर सरताज ने कहा, देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले से मेरा कोई रिश्ता नाता नहीं है. उसे तो अल्लाह भी माफ नहीं करेगा. उन्होंने ये भी बताया कि सैफुल्लाह ने ढाई महीने पहले घर छोड़ दिया था. एनकाउंटर के पहले फोन कर उसने जल्द ही सऊदी अरब जाने की बात कही थी.

उन्होंने कहा, मैं नहीं जानता कि वह आतंकी संगठन आईएसआईएस से कैसे जुड़ गया. अपने वतन की मिट्टी के साथ गद्दारी करने वाले का पिता कहते मुझे जिल्लत महसूस होती है. मेरे परिवार ने फैसला किया है कि सैफुल्लाह के शव को नहीं लेंगे.

सरताज ने बताया कि सैफुल्लाह ने बीकॉम तक की पढ़ाई की थी. वो अकाउंटिंग का काम सीखकर प्राइवेट काम करता था. यहां उसका मन नहीं लगता था वह सऊदी अरब जाना चाहता था.

बता दें कि सरताज के तीन बेटे हैं. सैफुल्लाह सबसे छोटा था. सबसे बड़ा बेटा खालिद शादीशुदा है और प्राइवेट जॉब करता है. वहीं, दूसरे नंबर का बेटा मुजाहिद है. वो चाय की दुकान चलाता है. सैफुल्लाह की मां का निधन पिछले साल हुआ था. सरताज जाजमऊ स्थित एक टेनरी में काम करते हैं.

गौरतलब है कि लखनऊ के हाजी कॉलोनी में मंगलवार देर 11 घंटे चले एनकाउंटर में सैफुल्ला मारा गया था.

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