4,000 कंपनियों को इनकम टैक्स विभाग ने भेजा नोटिस

आयकर विभाग काले धन के खात्मे और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) को सफल बनाने के लिए कोई कोर-कसर बाकी रखना नहीं चाहता है। आय घोषणा योजना-2 के नाम से चर्चित इस योजना की समय सीमा 31 मार्च को खत्म हो रही है लेकिन कर विभाग ने उससे पहले करीब 4,000 कंपनियों और अन्य फर्मों को नोटिस जारी किए हैं। नोटबंदी अभियान के दौरान इन कंपनियों के बैंक खातों में भारी मात्रा में (करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये) नकदी जमा कराने की बाबत नोटिस भेजा गया है।

जिन फर्मों को नोटिस भेजा गया है उनमें दूरसंचार ऑपरेटर, बीमा कंपनियां, पेट्रोल पंपों और ज्वैलर शामिल हैं। इनके बारे में कहा जा रहा है कि नोटबंदी के दौरान इनकी ओर से भारी मात्रा में नकदी जमा कराई गई है। यह नोटिस आयकर कानून, 1961 की धारा 142 के तहत जारी किए गए हैं। कंपनी जगत के कुछ नामचीन लोगों को भेजे गए कर नोटिस का बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अध्ययन किया है। इसके मुताबिक कंपनियों से कहा गया है कि वह 15 दिनों के अंदर जमा/आय के स्रोत के साथ ही इसके साक्ष्य में दस्तावेज उपलब्ध कराएं। कंपनियों को ईमेल के जरिये भी जवाब देने का विकल्प दिया गया है।

नोटिस में दिशानिर्देशिका और हेल्पडेस्क का नंबर भी दिया गया है। आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘नोटिस मैनुअली और इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरीके से भेजे गए हैं। फर्में संबंधित कर कार्यालय में जाकर भी विवरण जमा करा सकते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘अगर हम दी गई जानकारी से संतुष्ट होंगे तो उसकी आगे जांच नहीं की जाएगी। लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो और दस्तावेजों की मांग की जा सकती है।’

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सात हफ्ते की अवधि के दौरान 2-2 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी करीब 1 करोड़ खातों में जमा कराई गई, जिससे करीब 70 लाख से ज्यादा स्थायी खाता संख्या जुड़ी थीं। इनमें से सरकार ने 18 लाख लोगों को ई-फाइलिंग के जरिये सत्यापन कराने को कहा गया। ऐसे लोग जांच के दायरे में इसलिए आए क्योंकि उनकी नकदी जमा कर प्रारूप से मेल नहीं खा रही थी। 18 लाख लोगों में से विभाग को अब तक केवल 9 लाख लोगों से ही ऑनलाइन जवाब प्राप्त हुआ है।

कर अधिकारी ने बताया, ‘जो लोग अपना जवाब दाखिल नहीं कर पा रहे हैं या उनकी ओर से मुहैया कराई गई जानकारी पर्याप्त नहीं है, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है।’ सूत्रों ने कहा कि पेट्रोल पंपों, यूटिलिटी, दूरसंचार ऑपरेटरों, अस्पतालों और विमान कंपनियों के पास काफी मात्रा में पुराने नोट पहुंचे थे क्योंकि वे 15 दिसंबर तक इसे स्वीकार कर रहे थे। इसकी वजह से जमा में भी इजाफा हुआ हो।

कालेधन वालों को अंतिम मौका देते हुए सरकार ने 31 मार्च तक अघोषित नकदी जमा का खुलासा करने की मोहलत दी थी। इस योजना का लाभ उठाने वालों को घोषित नकदी का 50 फीसदी पीएमजीकेवाई में देना होगा और 25 फीसदी रकम चार साल के लिए सरकार के पास जमा रहेगा, जिस पर कोई ब्याज नहीं दिया जाएगा। इस योजना के तहत 75,000 करोड़ रुपये कर संग्रह का लक्ष्य है।

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