मुलायम की पत्नी साधना बोलीं- मेरा बहुत अपमान हुआ, अब पीछे नहीं हटूंगी

लखनऊ

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव की दूसरी पत्नी साधना यादव आज मीडिया के सामने खुलकर बोलीं. साधना गुप्ता न्यूज एजेंसी के माध्यम से सामने आकर परिवार विवाद से जुड़े सभी पहलुओं पर अपनी राय रखी.

साधना यादव ने परिवार के झगड़े पर खुलकर अपनी बात कही. उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में उनका बहुत अपमान हुआ है, अब वह पीछे नहीं हटेंगी और अब जो होगा खुलकर होगा. उन्होंने शिवपाल को पार्टी से दरकिनार किए जाने को गलत बताया, तो बेटे प्रतीक यादव के राजनीति में आने का इशारा भी दिया.

हालांकि, साधना ने यह भी कहा कि वह अखिलेश को फिर से मुख्यमंत्री के पद पर देखना चाहती हैं, लेकिन माना जा रहा है कि साधना के तीखे तेवर आने वाले वक्त में अखिलेश के लिए चुनौती बन सकते हैं.

समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई में साधना यादव की भूमिका को लकर तमाम तरह की अटकलें लगती रही हैं. इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, ‘प्रोफेसर साहब नेताजी को बहुत मानते थे, नेताजी भी उन्हें बहुत मानते थे. मैंने परिवार में झगड़ा नहीं कराया, नेताजी का अपमान नहीं होना चाहिए था. मेरा बहुत अपमान हुआ है, लेकिन अब जो होगा खुल कर होगा. अब मैं पीछे नहीं हटूंगी.’

उन्होंने कहा, ‘मेरे बारे में बात करने की लोगों में हिम्मत नहीं होनी चाहिए थी. मैं ऐसे परिवार में पली-बढ़ी जहां मेरे पिता कहा करते थे कि अपने काम का ज्यादा प्रचार नहीं करना चाहिए, पर अब वक्त बदल गया है.’

साधना ने आगे कहा, ‘दुष्ट लोगों ने मेरे बारे में गलत बोला, लोगों ने मेरे घर को बर्बाद किया, मैं दुष्ट लोगों को जवाब देना चाहती हूं, मैंने नेताजी को कह दिया है कि अब रुकूंगी नहीं, अब मुझे कोई रोक नहीं सकता. जो कुछ भी परिवार में हुआ वह देखकर मुझे बुरा लगता है. अपने ऊपर लगे आरोपों पर मैं किसी को दोष नहीं देती.’

जिस वक्त पार्टी और सरकार में तनातनी अपने चरम पर थी, उस समय यूपी के मुख्य सचिव रहे दीपक सिंघल को पद से हटाए जाने के मामले में साधना की भूमिका को लेकर काफी चर्चा हुई थी. इसके जवाब में साधना कहा, ‘एक मुख्य सचिव का ट्रांसफर हुआ और लोगों ने कहा कि इसके पीछे मैं थी. यह पूरी तरह गलत है, काश कि मैं इतनी ताकतवर होती.’

यादव परिवार को लेकर साधना ने कहा, ‘मैंने सबको समय दिया है. चाहे प्रोफेसर (राम गोपाल यादव) हों या उनके बेटे धर्मेंद्र या टीपू और बहुएं. मैंने सबको परिवार की तरह समझा है. मैं हमेशा नेताजी को श्रेय देना चाहती थी. मुझे हमेशा से लगता था कि मैं जो कुछ भी कर पा रही हूं, वह उनकी वजह से ही है.’

उन्होंने अखिलेश के लिए सीधे तौर पर तो कुछ बुरा तो नहीं कहा, पर यह जरूर कहा कि उन्हें गुमराह किया गया. साधना ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि अखिलेश को किसने गुमराह किया, वह नेताजी और मेरी बहुत इज्जत करते हैं. एक जनवरी से लेकर अब तक मैंने अखिलेश से जितनी बातें की हैं, उतनी पिछले 5 सालों में भी नहीं कीं. मैं चाहती हूं कि हमारी पार्टी फिर से जीते और अखिलेश मुख्यमंत्री बनें.’

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