DU में छिड़ा नया विवाद, सत्यवती कॉलेज में हुए प्ले का विरोध

दिल्ली यूनिवर्सिटी एक बार फिर गलत वजहों से विवादों में घिर रही है। इस बार सत्यवती कॉलेज में राम-सीता के अपमान का आरोप लगा है। 2 मार्च को कॉलेज में स्टूडेंट यूनियन फेस्ट हुआ, जिसमें मॉडर्न रामायण नाम से एक नाटक किया गया। इस नाटक में कई फिल्मी गानों का इस्तेमाल किया गया।

कई टीचर्स ने इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की है और कहा है कि यह नाटक कैसे हुआ इसकी जांच की जाए। मंगलवार को कॉलेज काउंसिल की मीटिंग होनी है, जिसमें कई टीचर्स इस मामले को जोर-शोर से उठाने की तैयारी कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक सत्यवती कॉलेज में हुए इस नाटक का विडियो सोशल मीडिया में भी चल रहा है। उन्होंने बताया कि यह नाटक 17 फरवरी को कॉमर्स सोसाइटी के फेस्ट में भी किया गया था। फिर से 2 मार्च को इस नाटक को स्टूडेंट यूनियन फेस्ट में दोहराया गया।

इसमें नाटक का सूत्रधार कहता है कि यह अयोध्या के राजा दशरथ का दरबार है। फिर एक शख्स हाथ में धनुष लिए आता है और बैकग्राउंड में गाना बजता है, ‘वन टू का फोर माई नेम इज लखन’ इसके बाद दूसरे शख्स की एंट्री होती है और गाना बजता है, ‘रामजी की चाल देखो…’। इस गाने पर दशरथ, राम और लखन तीनों डांस करते हैं।

सीता की एंट्री के वक्त गाना बजता है लैला मैं लैला…। इसके बाद राम और सीता ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है’ गाने पर डांस करते हैं। नाटक में रावण की एंट्री ‘नायक नहीं खलनायक हूं मैं’ गाने के साथ होती है। फिर नाटक का सूत्रधार कहता है, सीता हरण का सीन और गाना बजता है-तू हां कर या ना कर तेरी मर्जी….हम तुझको उठाकर ले जाएंगे।

नाटक का सूत्रधार हालांकि नाटक की शुरुआत में कहता है कि इस नाटक का किसी से कोई संबंध नहीं है यह कल्पना पर आधारित है।

सूत्रों के मुताबिक जिन स्टूडेंट्स ने यह नाटक किया उन्होंने यह कॉलेज की ड्रामा सोसाइटी के नाम पर किया था। लेकिन ड्रामा सोसाइटी के लोगों का कहना है कि उन स्टूडेंट्स को ड्रामा सोसाइटी से निकाल दिया गया था। सूत्रों ने बताया कि सोमवार को टीचर्स की ओर से प्रिंसिपल को इस संबंध में शिकायत दी गई।

शिकायत पत्र में कहा गया है, ‘2 मार्च को हुए स्टूडेंट यूनियन फेस्ट में मॉडर्न रामायण नाम से नाटक किया गया। जिसका कंटेंट एक खास वर्ग समूह की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला था। इसका विडियो वॉट्सऐप ग्रुप में चल रहा है। जिस पर कई टीचर्स की कड़ी आपत्ति की है। शिक्षण संस्थानों में किसी भी धर्म या वर्ग की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इसकी जांच कराएं, यह सामान्य मामला नहीं है’।

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