JNU की दीवारों पर फिर लगे ”कश्मीर की आजादी” के पोस्टर

कश्मीर के लिए आजादी की मांग करने वाले एक पोस्टर ने गुरुवार को जवाहर लाल यूनिवर्सिटी प्रशासन को परेशानी में डाल दिया। कुछ छात्रों ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज (एसएसएस) के नये खंड की दीवार पर इन पोस्टरों को देखा और प्रशासन को इस बारे में अवगत कराया। जिसके बाद जेएनयू प्रशासन ने कश्मीर और फलस्तीन के लिए आजादी की मांग को लेकर अपने कैंपस में लगाए गए विवादास्पद पोस्टरों को हटाने का आदेश दिया। दीवारों पर ‘कश्मीर के लिए आजादी…मुक्त फलस्तीन…आत्मनिर्णय का अधिकार जिंदाबाद – डीएसयू’ लिखा हुआ पोस्टर वामपंथी रूझान वाले डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (डीएसयू) द्वारा लगाया गया था।

जेएनयू प्रशासन ने विश्वविद्यालय सुरक्षा टीम से गुरुवार शाम में पोस्टरों को हटाने को कहा। डीएसयू वही संगठन है जिसकेपूर्व सदस्यों उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और अन्य ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरू को फांसी दिए जाने के खिलाफ पिछले साल 9 फरवरी को विवादास्पद कार्यक्रम का आयोजन किया था। कार्यक्रम में कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी नारेबाजी हुयी थी, जिसके बाद पुलिस ने छात्रों के खिलाफ केस दर्ज किया था।

विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘विश्वविद्यालय का कीमती वक्त और ऊर्जा ऐसे बेकार के विवादों में बर्बाद होती है। दुर्भाग्य से लोगों का एक छोटा समूह अब भी हंगामे का माहौल बनाना चाह रहा है और शैक्षणिक माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहा है।’ उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कर्मचारियों से पोस्टर हटाने को कहा है। वाम दल के एक छात्र ने बताया कि यह पोस्टर तीन-चार दिन से लगा हुआ था। लेकिन इसमें कुछ भी नया नहीं था क्योंकि डीएसयू इस तरह के पोस्टर अक्सर लगाता रहता है। बता दें कि 9 फरवरी की घटना के बाद उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को पूर्व जेएनयू छात्र संघ के प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार समेत देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था, जो फिलहाल बेल पर बाहर हैं।

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