पत्रकार पंकज खन्ना सुसाइड केस में पूर्व CPS समेत 3 लोगों को 4-4 साल की सजा

अंबाला

अंबाला जिले में नारायणगढ़ के पत्रकार पंकज खन्ना सुसाइड केस में गुरुवार को जिला अदालत ने हरियाणा के पूर्व सीपीएस रामकिशन गुर्जर को चार साल की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

एडिशनल सेशन जज संजीव आर्य इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने का जिम्मेदार मानते हुए रामकिशन गुर्जर सहित 3 लोगों को 4-4 साल की कैद और 10-10 हजार रुपए की सजा सुनाई है. कोर्ट ने इन तीनों को मंगलवार को दोषी करार दिया था.

बता दें कि ये मामला 10 जून 2009 का है. जब नारायणगढ़ के पत्रकार पंकज खन्ना ने आत्महत्या कर ली थी. मरने से पहले पंकज ने अपने लिखे सुसाइड नोट में तत्कालीन विधायक रामकिशन गुर्जर, अजीत व विजय कुमार को जिम्मेदार ठहराया था.

27 वर्षीय पंकज ने लिखा था कि विधायक गुर्जर ने उसके खिलाफ झूठा केस दर्ज कराने के बाद थाने में दो बार जमकर पिटवाया. पंकज के आत्महत्या पत्र के मुताबिक वो घर की हुई बदनामी और इज्जत खराब होने के कारण जान दे रहा है.

बाद में पुलिस ने सुसाइड नोट भी बरामद कर लिया, लेकिन पुलिस प्रभावशाली पदों पर होने के चलते आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती रही.

स्थानीय लोगों और मीडियाकर्मियों के दबाव के चलते पुलिस को विधायक रामकिशन के खिलाफ धारा 306 में रिपोर्ट दर्ज करना पड़ा. हरियाणा पुलिस ने पंकज के शव का पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित पीजीआई में कराया.

बताया जा रहा है कि पंकज के आत्महत्या के बाद उनके परिजन जब सूचना देने व रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचे तो पुलिस वालों ने उनसे धक्का-मुक्की करके भगा दिया था. पंकज के परिजनों का कहना था कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे भी पंकज की तरह जान देने के लिए मजबूर हो जाएंगे.

पहले इकलौता भाई और बाद में पिता की मौत से हताश होने के बावजूद बहन प्रीति खन्ना ने हार नहीं मानी. प्रीति ने चुनौतियों का सामना किया और रामकिशन गुर्जर के खिलाफ लड़ाई जारी रखी. वर्ष 2009 में भाई पंकज की मौत का उसके कैरियर पर असर पड़ा. पिछले सात साल से उसने इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी.

करीब एक साल के बाद अक्टूबर 2016 में इस केस में मुकरे गवाहों को अदालत ने दोबारा तलब किया था.

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