हवाई जहाज को भी पीछे छोड़गी ‘हाइपरलूप ट्रेन’, प्रभु कर रहे हैं तैयारी

अपनी लेटलतीफी के लिए मशहूर भारतीय रेल को तेज तर्रार बनाने का सपना रेल मंत्री सुरेश प्रभु देख रहे हैं और इस सपने को पंख लगाने का काम हाइपरलूप वन नाम की एक कंपनी कर रही है. हाइपरलूप वन कंपनी ने राजधानी दिल्ली में रेलवे के अधिकारियों और मीडिया के लिए हाइपरलूप रूट्स के बारे में एक सम्मेलन बुलाया.

इस सम्मेलन में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने नई तकनीक में भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हाइपरलूप कंपनी लास एंजल्स में हो रहे अपने प्रयोगों में सफलता के झंडे गाड़ेगी. लेकिन इस तकनीक के बारे में बहुत ज्यादा हाईपर होने की जरूरत नहीं है. भारतीय रेलवे तमाम ऐसे रास्तों पर विचार कर रही है जिससे उसकी ट्रेनों की रफ्तार तेजी से बढ़ सके.

हाइपरलूप कंपनी के द्वारा पेश किया गया कांसेप्ट आकर्षक है और ऐसी किसी भी तकनीक में भारतीय रेलवे पार्टनरशिप करना चाहती है. हाइपरलूप के सम्मेलन में नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी अपनी बात रखी उन्होंने कहा की बढ़ती हुई आबादी के मद्देनजर भारत को रेलवे के मामले में नई टेक्नोलॉजी की तरफ रुख करना पड़ेगा.

हाइपरलूप एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जिसमें बड़े-बड़े पाइपों के अंदर की हवा को पूरे तरीके से निकालकर उसमें तेज रफ्तार से ट्रेन चलाई जाएगी. खास बात यह है कि इस पाइप के अंदर ट्रेन लेवीटेशन टेक्नोलॉजी से बढ़ाई जाएगी. लेविटेशन टेक्नोलॉजी के तहत ट्रेन को बड़े-बड़े इलेक्ट्रिक चुंबकों के ऊपर से चलाया जाता है इसमें चुंबकीय शक्ति के प्रभाव से ट्रेन ऊपर उठ जाती है और फिर यह बड़ी तेजी से ट्रैक के ऊपर उठकर चलती है.

इस कांसेप्ट को मैग्लेव ट्रेन में इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन मैग्लेव ट्रेन का ट्रैक हवा में खुला होता है लिहाजा इसकी रफ्तार 500 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही जा सकती है. इसकी वजह यह है कि तेज रफ्तार में हवा एक अवरोधक का काम करती है और घर्षण की वजह से ट्रेन की रफ्तार एक निश्चित रफ्तार से ज्यादा नहीं हो सकती है.

इस कठिनाई से पार पाने के लिए ट्रेन को बड़े-बड़े बेलनाकार पाइपों के अंदर निर्वात पैदा करके चलाया जा सकता है. इसके लिए एक खास तरीके की तकनीक पिछले दिनों में सामने आई है जिसमें यह कहा जा रहा है की ट्रेन को 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चलाया जा सकेगा.

हाइपरलूप के नाम से मशहूर यह टेक्नोलॉजी टेस्ला मोटर्स के सीईओ एलन रीव मस्क ने इजाद की है. खास बात यह है कि हाइपरलूप वन कंपनी अपनी इस टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा कुछ शेयर नहीं कर पा रही है. ऐसा अनुमान है कि हाइपरलूप तकनीक में सुपर कंडक्टिविटी का भी इस्तेमाल किया जाएगा.

हाइपरलूप वन विजन फॉर इंडिया नाम के इस सम्मेलन में हाइपरलूप वन ग्लोबल चैलेंज के सेमीफाइनल में पहुंची 5 टीमों के प्रस्तावित हाई स्पीड ट्रांसपोर्टेशन रूस के बारे में भी जानकारी दी गई. इस ग्लोबल चैलेंज में दुनिया भर के 90 देशों की तमाम कंपनियों ने भाग लिया जिनमें से 35 सेमी फाइनलिस्ट को छांटा गया.

जिन पांच सेमीफाइनलिस्ट को इस लिस्ट में जगह मिली है वह हैं
1- AECOM बेंगलुरु से चेन्नई: 334 किलोमीटर लंबे इस रूट पर हाइपरलूप ट्रेन अपना सफर महज 20 मिनट में पूरा करेगी
2- LUX HYPERLOOP NETWORK बेंगलुरु से तिरुवनंतपुरम 736 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग पर हाइपरलूप ट्रेन अपना सफर 41 मिनट में पूरा करेगी
3- DICLIX GROUNDWORKS दिल्ली से मुंबई जयपुर और इंदौर होकर हाइपरलूप ट्रेन 1370 किलोमीटर का रास्ता अब महज 55 मिनट में तय करेगी
4- HYPERLOOP INDIA मुंबई से चेन्नई बेंगलुरु होकर हाइपरलूप ट्रेन 1102 किलोमीटर का सफर महज 50 मिनट में पूरा करेगी
5- INFI ALPHA बेंगलुरु से चेन्नई 334 किलोमीटर का सफर महज 20 मिनट में हाइपरलूप ट्रेन पूरा करेगी

हाइपरलूप कंपनी को भारत में एक बड़ा बाजार दिख रहा है और खास बात यह है यहां की सरकार आधुनिक तकनीक पर ज्यादा जोर दे रही है. भारतीय रेलवे ने पिछले साल देश में मैग्लेव ट्रेन जैसी टेक्निक लाने के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला था जिसमें अनेक कंपनियों ने भाग लिया था. लेकिन इस ग्लोबल टेंडर में मेक इन इंडिया के लिए हाइपरलूप के अलावा कोई दूसरी बड़ी कंपनी तैयार नहीं हुई थी. लिहाजा भारतीय रेलवे और इसके मंत्री सुरेश प्रभु हाइपरलूप से हाईपर उम्मीदें लगाए बैठे हैं.

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