ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद इस मुस्लिम महिला ने छोड़ा व्हाइट हाउस

वॉशिंगटन

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा 7 मुस्लिम देशों पर लगाए गए ट्रैवल बैन की आलोचना करते हुए वाइट हाउस में काम करने वाली एक हिजाबधारी मुस्लिम महिला ने नई सरकार के 8वें दिन बाद ही अपनी नौकरी छोड़ दी.

मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वालीं रुमाना अहमद ने 2011 में वाइट हाउस में काम करना शुरू किया था और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (एनएससी) में कार्यरत थीं. ट्रंप ने 27 जनवरी को ईरान, इराक, लीबिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया और यमन के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया था. इस बैन पर अमेरिकी कोर्ट ने फिलहाल स्टे लगा दिया है.

‘द अटलांटिक’ अखबार में प्रकाशित अपने लेख में उन्होंने कहा, ‘मेरा काम अपने देश के लिए सर्वश्रेष्ठ को बढ़ावा देना और उसकी रक्षा करना था. मैं हिजाब धारण करने वाली मुस्लिम महिला हूं. वेस्ट विंग में मैं एकमात्र हिजाब पहनने वाली महिला थी और ओबामा प्रशासन ने हमेशा मुझे यह महसूस करवाया कि मेरा उनके बीच स्वागत है और मैं उनमें शामिल हूं.’

रुमाना ने कहा कि अधिकतर साथी अमेरिकी-मुस्लिमों की तरह मैंने भी साल 2016 में अपना अधिकतर समय ‘डर’ में बिताया, क्योंकि ट्रंप ‘हमारे समुदाय को अपमानित’ करते थे. उन्होंने कहा, ‘इसके बावजूद मैंने सोचा कि नए राष्ट्रपति और उनके सहयोगियों को इस्लाम और अमेरिका के मुस्लिम नागरिकों के प्रति सूक्ष्म नजरिया देने के लिए मुझे ट्रंप प्रशासन में भी बतौर एनएससी कर्मचारी बने रहना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘मैं सिर्फ 8 दिन ही वहां काम कर पाई. ट्रंप ने जब 7 मुस्लिम-बहुल देशों के यात्रियों और सभी सीरियाई शरणार्थियों पर प्रतिबंध जारी किया, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं यहां अब और नहीं रह सकती और ऐसे प्रशासन के साथ काम नहीं कर सकती जो मुझे या मेरे जैसे लोगों को अपना साथी नागरिक नहीं बल्कि एक खतरा समझता है.’

रुमाना ने बताया कि वाइट हाउस में नौकरी छोड़ने से एक दिन पहले उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के संचार सलाहकार माइकल एंटन को अपने फैसले से अवगत करा दिया था.

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