पुलिस ने 24 घंटे में सुलझाया ट्रिपल मर्डर केस, पढ़ें हत्याकांड के पीछे किसका हाथ था

एक ही घर की तीन महिलाओं से सिर में गोली मार दी गई लेकिन जब राज खुला तो सभी हैरान रह गए। मामला पंजाब के जालंधर का है, यहां वीरवार को एक घर में घुसकर तीन महिलाओं से सिर में गोली मार दी गई थी जिसमें तीनों की मौत हो गई। इस ट्रिप्पल मर्डर केस की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही आरोपी पेट्रोल पंप के मालिक अमरिंदर सिंह शंटू को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने खुलासा किया कि शंटू ने ही सुपारी देकर अपनी मां, पत्नी और उसकी सहेली का कत्ल करवाया था। शंटू ने यह वारदात अपनी प्रेमिका रूबी के साथ साजिश कर की थी। इसका खुलासा कमिश्नर अर्पित शुक्ला, डीसीपी संदीप शर्मा व एसपी मनप्रीत ढिल्लों ने पत्रकार वार्ता में किया। उन्होंने बताया कि वारदात के लिए आठ लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। इसमें एक लाख 4 हजार की राशि बतौर अग्रिम अदा की जा चुकी थी। पुलिस ने पंप मालिक शंटू और रूबी को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सुपारी लेकर हत्या करने वाले दोनों फरार चल रहे हैं। दोनों हत्यारे सूबे से बाहर निकल चुके हैं, जिनके मोबाइल अन्य प्रदेशों में चल रहे हैं। उनको गिरफ्तार करने के लिए टीमों को रवाना कर दिया गया है।

जालंधर में ट्रिपल मर्डर, कई सवालों में उलझी पुलिस

ऐसे रची थी साजिश
कमिश्नर अर्पित शुक्ला ने बताया कि अमरिंदर सिंह शंटू के पेट्रोल पंप के साथ-साथ फैक्टरी भी है। वहां पर तजिंदर कौर रूबी काम करती थी। रूबी का पति भी इसी फैक्टरी में कार्यरत था। रूबी और शंटू के बीच 2013 में संबंध बन गए, जिसकी भनक लगते ही रूबी के पति ने उससे अलग रहना शुरू कर दिया। क्लेश होने के बाद रूबी को भी फैक्टरी से नौकरी छोड़नी पड़ी, लेकिन दोनों के बीच संबंध कायम रहे
शंटू ने 2015 में रूबी को दीप नगर इलाके में मकान खरीदकर रहने के लिए दिया। दिसंबर 2016 में शंटू की पत्नी परमजीत कौर और मां दलजीत कौर को पता चला तो वह दीप नगर पहुंच गई और वहां पर झगड़ा करके आई। रूबी अपने मां बाप के पास जमशेर में रहने चली गई। इसके बाद भी रूबी व शंटू के बीच फिर भी रिश्ता कायम रहा।

रूबी चाहती थी कि शंटू अपनी पत्नी परमजीत कौर पम्मी से तलाक लेकर उससे शादी करे, लेकिन पम्मी व उसके मायके वाले इसके लिए राजी नहीं थे। आखिरकार शंटू और रूबी ने पम्मी को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। इसके लिए पहले पम्मी को एक्सीडेंट में मारने का प्लान बनाया गया, लेकिन उनका छोटा बच्चा भी इसका शिकार न हो जाए इसके लिए प्लान बदल दिया गया। शंटू के पुराने रिश्ते नशे तस्करी में जेल से छूटे विपिन निवासी रामामंडी से थे। शंटू ने उसके साथ बात की तो उसने आगे चब्बेवाल होशियारपुर के अमृत के साथ मिलाया। अमृत ने पम्मी की हत्या के लिए सौदा आठ लाख रुपये में तय किया तो शंटू ने तत्काल एक लाख 4 हजार की पेशगी दे डाली।

अमृत और विपिन दोनों यूपी चले गए और वहां से एक पिस्तौल खरीदकर ले आए। 21 फरवरी को विपिन व अमृत ने शंटू की कोठी की निगरानी करनी शुरू कर दी। दोनों शंटू की लाजपत नगर कोठी गए और कहा कि उनको हाई मेगा पिक्सल कैमरे लगाने हैं, इसलिए पुराने कैमरे व डीवीआर उनको ले जानी होगी। वह पम्मी का चेहरा व घर का सारा नक्शा देखकर आ गए। 22 फरवरी को हत्या के इरादे से गए तो उस समय शंटू का बड़ा बेटा कोठी के बाहर खड़ा था, इसलिए वारदात को अंजाम नहीं दे सके।
23 फरवरी का दिन चुना गया। शंटू ने योजना मुताबिक अपने दोनों बेटों को 4 बजे घर से यह कहकर साथ ले लिया कि वह एक जीप खरीदने जा रहे हैं। शंटू को यकीन था कि उसकी मां दलजीत कौर रोजाना की तरह 4 बजे घर सैर के लिए निकल जाएगी, लेकिन वीरवार को वह नहीं गई। विपिन व अमृत दोनों शाम को घर पहुंचे और सीसीटीवी कैमरे लगाने के बारे में कहा।

जैसे ही दोनों कोठी के अंदर आए तो उन्होंने ड्राइंग रूम का दरवाजे की चिटखनी लगा दी। अंदर पिस्तौल सेे परमजीत कौर, दलजीत कौर व नीतू पर गोलियां दाग दी। इसके बाद वे पिछले रास्ते से ताला खोलकर फरार हो गए। शंटू को काल करके बताया कि उन्होंने अपना काम कर दिया है। शंटू ने इसके बाद 4.47 पर रूबी को बताया कि उनका काम पूरा हो गया है, लेकिन शंटू को यह नहीं पता था कि हत्यारों ने उसकी मां की भी हत्या कर दी है। विपिन और अमृत हत्या करने के बाद शहर से निकल गए और बाद में उनके मोबाइल दूसरे प्रदेशों में चलने लगे।

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