दुनिया के 400 एकेडमीशियंस ने लिखा JNU के VC को लेटर

दुनिया की नामी यूनिवर्सिटीज के एकेडमीशियंस ने पिछले दिनों जेएनयू में हुए विरोध प्रदर्शनों पर वाइस चांसलर जगदीश कुमार को लेटर लिखा। इन 400 एकेडमीशियंस ने यूनिवर्सिटी के मौजूदा हालात पर चिंता जताई है। इनमें हार्वर्ड, कैम्ब्रिज, लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स जैसे नामी इंस्टीट्यूट्स और इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज के 400 एकेडमीशियंस शामिल हैं। लेटर में कहा गया है कि जेएनयू के एकेडमिक कल्चर और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूशंस के साथ तालमेल पर गंभीर खतरा है। इसके लिए जरूरी कदम उठाएं।

जेएनयू को जानबूझकर खत्म किया जा रहा…
– लेटर में यह भी कहा गया, ”पिछले दिनों यूनिवर्सिटी के कामकाज को लेकर जो कुछ हुआ वह चिंताजनक है। हम इंटरनेशलन लेवल पर पहचान रखने वाली जेएनयू की अथॉरिटी से मांग करते हैं कि भविष्य के लिए बेहतर कदम उठाने जाएं। यहां से बेहतर रिसर्च स्कॉलर और प्रोफेशनल्स निकलते हैं।”
– ”यूनिवर्सिटी अपनी एकेडमिक फ्रीडम, ऑटोनोमी, बेहतर डिबेट और डिस्कशन के लिए ग्लोबल लेवल पर पहचान रखती है। चौकाने वाली बात है कि इसे जानबूझकर खत्म किया जा रहा है।”
– रिसर्च कोर्सेस में एडमिशन की प्रोसेस में बदलाव पर कहा गया है कि, ”यह पब्लिक एजुकेशन पर हमला है। इससे हाशिए पर रहने वाली इंडियन कम्युनिटी के स्टूडेंट जेएनयू में पढ़ाई के लिए नहीं आ पाएंगे। यूनिवर्सिटी को अपनी एडमिशन पॉलिसी पर काम करना चाहिए।”

एक साल से जेएनयू में जारी है बवाल
– फरवरी, 2016 में जेएनयू में कुछ स्टूडेंट्स ने देश विरोधी नारे लगाए थे। जिससे यूनिवर्सिटी की नेगेटिव इमेज बनी। संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु और मकबूल भट्ट के लिए प्रोग्राम करने से रोकने पर कश्मीर की आजादी के लिए नारेबाजी हुई थी।
– इसके बाद अक्टूबर, 2015 में यूनिवर्सिटी के लापता स्टूडेंट नजीब अहमद को खोजने की मांग पर स्टूडेंट्स ने एकेडमिक ब्लॉक में वीसी, रजिस्ट्रार समेत कई अफसरों को रातभर बंधक बनाकर रखा। वीसी ने आरोप लगाया था कि खाना तो दूर उन्हें किसी ने पानी तक के लिए नहीं पूछा।
– तीसरा मामला तब हुआ जब कुछ दिन पहले यूनिवर्सिटी के रिसर्च कोर्सेस के लिए एडमिशन प्रोसेस में बदलाव करने पर स्टूडेंट्स ने वीसी और एडमिस्ट्रेशन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। कई दिन एकेडमिक ब्लॉक के बाहर धरना दिया और स्टाफ को काम नहीं करने दिया।

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