मासूमों को मारने वालों को नहीं मिलेगी अंतरिम जमानत और परोल: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली

सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए लाजपत नगर बम धमाकों के दोषी को बेटी की शादी में जाने के लिए जमानत देने से इंकार कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जो लोग आम लोगों की हत्या के आरोपी हैं, उन दोषियों को अदालत की ओर से नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.

1996 में लाजपत नगर में बम धमाकों में मोहम्मद नौशाद मुख्य दोषी है, इन धमाकों में कुल 13 लोगों की मौत हुई थी. वहीं 38 लोग घायल हुए थे. नौशाद की बेटी की शादी मार्च में होनी है, जिसके लिए उसने एक महीने की पैरोल मांगी थी.

नौशाद के वकील सिद्धार्थ दवे ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि नौशाद 20 साल जेल में गुजार चुका है इसलिए अदालत को उसके प्रति नरमी दिखानी चाहिए. तो जवाब में सरकारी वकील पीके डे ने इसका विरोध किया, उन्होंने कहा कि सीबीआई ने पहले ही नौशाद को दी गई आजीवन कारावास की सजा को मौत में बदलने की याचिका दाखिल की है. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने नौशाद की जमानत याचिका रद्द कर दी.

अपने फैसले में इस पीठ ने कहा कि यह एक अति घृणित अपराध है, जो लोग ऐसी हरकतें करते हैं, उन्हें इस बात का अहसास होना चाहिए कि इससे लोगों का परिवार खत्म हो जाता है. पीठ ने कहा कि आप आम लोगों को मारते रहें और अपने परिवार की बात करें दोनों ओर आपकी मर्जी नहीं चलेगी. आप लोगों की हत्या कर अपने परिवार का हवाला नहीं दे सकते हैं.

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