पैरा एथलीट ज्योति जांगड़ा को मिला भीम पुरस्कार, जानें कैसे हासिल किया ये मुकाम

सोनीपत

बुलंद हौसलों और मजबूत इरादों के बाद ही सफलता का स्वाद चखा जा सकता है और ऐसे में अगर अपनों का साथ मिल जाए तो मुश्किल रास्ते और आसान हो जाते हैं. कुछ ऐसी ही कहानी सोनीपत में रहने वाली पैरा एथलीट ज्योति जांगड़ा की है.

सोनीपत के गांव विशाल नगर की रहने वाली पैरा एथलीट ज्योति जांगड़ा प्रदेश का वो गौरव हैं जिन्होंने दिव्यांग होने के बावजूद भी खेलों में हरियाणा का नाम रोशन किया है. हरियाणा सरकार ने ज्योति जांगडा की प्रतिभा का सम्मान कर उन्हें भीम पुरस्कार दिया है.

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ज्योति से पैरा एथलीट ज्योति जांगड़ा बनने का सफर उनके लिए इतना आसान नहीं रहा. बुलंद हौसले, कड़ी मेहनत और अटल इरादों के बल पर ज्योति ने ये मुकाम हासिल किया और उनकी सफलता की सीढ़ी बनी उनकी मां. करीब 15 साल पहले ज्योति के पिता का निधन हो गया था, बेटी की परवरिश की पूरी जिम्मेदारी उनकी मां पर आ गई और इस जिम्मेदारी को उन्होंने इतनी बखूबी संभाला कि आज उनकी बेटी पूरे गांव और प्रदेश की शान बन चुकी है.

ज्योति बताती हैं कि बचपन से उनका एक हाथ काम नहीं करता था, इसके बावजूद वो हॉकी खेलना चाहती थी, लेकिन ट्रायल के दौरान मेडिकल चेकअप के बाद उन्हें बाहर कर दिया गया. ये ऐसा समय था, जब कई लोग हिम्मत हार हा जाते और किस्मत को कोसते हुए हालातों के आगे सरेंडर कर देते हैं. लेकिन ज्योति ने हालातों को बदलने का जज्बा दिखाया और हिम्मत से आगे बढ़ते हुए अपने सपनों को पंख दिए और आज एक पैरा एथलीट बनकर आज वो कई माइलस्टोन तय कर रही है.

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ज्योति की सफलता का पैमाना अगर अवार्ड से मापे तो वो अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई अवार्ड अपने नाम कर चुकी हैं. पैरा एथलेटिक्स नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुकी ज्योति ने चाइना में भी देश की अगुवाई की है और उनकी इसी प्रतिभा को सरकार ने सम्मानित किया है.

ज्योति जांगड़ा समेत आठ और खिलाड़ियों को प्रदेश सरकार ने भीम अवार्ड दिया है. ज्योति आज उन सभी के लिए एक मिसाल बन गई है. जो अक्सर अपनी कमजोरी के आगे जिंदगी से समझौता कर लेते है, लेकिन अगर वो अपनी इसी कमजोरी को ताकत बना दे तो आसमां को भी झुकाने की माद्दा रखते हैं और ज्योति जांगड़ा इसका जीता जागता उदाहरण हैं.

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