तमिलनाडु विधानसभा में भारी हंगामा, DMK विधायकों ने टेबल-कुर्सियां तोड़ीं

चैन्नई

तमिलनाडु के 7.5 करोड़ लोगों की नजर राज्य की विधानसभा पर है, जहां आज मुख्यमंत्री पलानीस्वामी बहुमत साबित करने जा रहे हैं. उन्होंने गुरुवार को शपथ ली थी. राज्यपाल ने उन्हें शक्ति परीक्षण के लिए 15 दिन का वक्त दिया था. लेकिन विधायकों को लेकर बरकरार अनिश्चितता को देखते हुए उन्होंने 2 दिन बाद ही विधानसभा का खास सत्र बुलाकर इस अग्निपरीक्षा से गुजरने का फैसला किया.

वहीं, इसे लेकर डीएमके विधायक धरने पर बैठे हैं. जिसके बाद स्पीकर ने डीएमके विधायकों को सदन से बाहर निकलवाया. विधानसभा के बाहर 2000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

स्पीकर पी धनपाल ने कहा कि मैं सदन की कार्यवाही के संचालन के लिए बाध्य हूं. मेरे साथ क्या हुआ, मैं किसी बताने जाऊं. मेरी कमीज फाड़ दी गई और मेरा अपमान किया गया.

बता दें कि विधानसभा में जबरदस्त हंगामे के बाद तोड़-फोड़ शुरू हो गई. स्पीकर के सामने वाली टेबल-कुर्सियां तोड़ी गईं. इससे पहले पन्नीरसेल्वम ने स्पीकर से मांग की है कि शक्ति परीक्षण से पहले विधायकों को उनके विधानसभा क्षेत्रों में जाने दिया जाए. लोगों का मन जानने के बाद फ्लोर टेस्ट कराया जाए.

कांग्रेस ने भी गुप्त मतदान की मांग की. विश्वास मत एक दिन के लिए टालने की DMK की मांग खारिज. स्टालिन ने कहा कि सदन में शक्ति परीक्षण किसी और दिन किया जाना चाहिए, इसके लिए राज्यपाल ने 15 दिन का समय दिया है. जिसके बाद स्पीकर ने गुप्त मतदान की मांग खारिज कर दी.

गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा में कुल 235 सदस्य हैं. शशिकला के समर्थक विधायकों की अगुवाई कर रहे पलानीस्वामी को कुर्सी बचाने के लिए 118 सदस्यों के समर्थन की जरुरत है. लेकिन जयललिता की सीट फिलहाल खाली है और बीमार चल रहे डीएमके नेता करुणानिधि के सत्र में शामिल होने की उम्मीद कम है. यानी बहुमत का जादुई आंकड़ा घटकर 117 हो गया है.

पलानीस्वामी खेमा शुक्रवार तक पार्टी के कुल 134 विधायकों में से 124 के समर्थन का दावा कर रहा था. लेकिन पार्टी विधायक और राज्य के पूर्व डीजीपी आर. नटराज के पाला बदलकर पन्नीरसेल्वम खेमे में जुड़ने के बाद ये संख्या 123 रह गई है.

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