देश का सबसे बड़ा बैंक SBI, अब होगा और भी बड़ा

सरकार ने देश में सबसे बड़े बैंकिंग एकीकरण को हरी झंडी दिखाते हुए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में पांच सहायक बैंकों के विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। हालांकि इस विलय में भारतीय महिला बैंक को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्तीय सेवाओं के सचिव अंजली छिब दुग्ग्गल ने यह नहीं बताया कि विलय कब से प्रभावी होगा, लेकिन चालू वित्त वर्ष में इसके होने की संभावना कम ही है।

एसबीआई में जिन पांच सहायक बैंकों का विलय होना है, उनमें स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर ऐंड जयपुर तथा स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर शामिल हैं। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जेटली ने कहा कि विलय से बैंकों के बीच अच्छा तालमेल होगा और परिचालन लागत में भी कमी आएगी। एक अधिकारी ने कहा कि विलय के पहले साल में ही बैंक को 1,000 करोड़ रुपये की बचत करने में मदद मिलेगी।

जेटली ने भरोसा दिलाया कि विलय के कारण संबंधित बैंकों के किसी भी कर्मचारी को उनके काम से नहीं हटाया जाएगा। अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि इस बारे में जब प्रस्ताव आएगा तब जानकारी दे दी जाएगी। एसबीआई का शेयर आज 0.68 फीसदी की गिरावट के साथ 268.65 रुपये पर बंद हुआ।

इससे पहले एसबीआई की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा था कि विलय की योजना एक तिमाही टल सकती है जबकि पहले इस साल मार्च में विलय की योजना बनाई गई थी। इसके बारे में उन्होंने कहा था कि अब तक सरकार से मंजूरी नहीं मिल पाई है। अगर अभी मंजूरी मिलती भी है तो अंतिम तिमाही में विलय करना सही नहीं होगा। पिछले साल मई में एसबीआई ने विलय के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद पिछले साल जून में कैबिनेट ने इसे सैद्घांतिक मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव को संबंधित बैंकों और एसबीआई के बोर्ड के पास भेजा गया था, जहां से इसे मंजूरी दे दी गई थी।

विलय से एक बड़ी बैंकिंग इकाई का गठन होगा जिसकी परिसंपत्ति 37 लाख करोड़ रुपये होगी। एसबीआई की परिसंपत्ति का आधार देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक से करीब पांच गुना हो जाएगा। विलय के बाद एसबीआई की शाखाओं की संख्या 22,500 होगी और देश भर में इसके 58,000 एटीएम होंगे। इसके ग्राहकों की संख्या 50 करोड़ से ज्यादा होगी।

Share With:
Rate This Article