दिल्‍ली सीरियल ब्‍लास्‍ट मामले में एक दोषी करार, कोर्ट ने 2 अन्य को बरी किया

दिल्ली

यहां 2005 में हुए सीरियल ब्लास्ट केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया. कोर्ट ने किसी को भी ब्लास्ट का दोषी नहीं माना. तीन में से 2 आरोपियों को बरी कर दिया गया. तीसरे आरोपी को कोर्ट ने दोषी माना लेकिन गैरकानूनी गतिविधि चलाने के आरोप में, उसे 10 साल सजा सुनाई गई जो वह पहले ही काट चुका है.

कोर्ट ने तारिक अहमद डार को गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने के लिए 10 साल की सजा सुनाई. 11 साल से जेल में होने पर उसकी सजा पूरी मानी गई. दो आरोपी मोहम्मद रफीक शाह और मोहम्मद हुसैन फाजिल को कोर्ट ने बरी कर दिया.

इसके पहले एडिशनल सेशन जज रितेश सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसले की तारीख 16 फरवरी तय की थी. 2008 में कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिल और मोहम्मद रफीक शाह डार पर आरोप तय किए थे.

पुलिस ने चार्जशीट में उन पर देश के खिलाफ जंग छेड़ने, साजिश रचने, हथियार जुटाने, हत्या और हत्या की कोशिश के आरोप लगाए थे. पुलिस ने तारिक को हमले का मास्टरमाइंड बताया था. पुलिस का दावा था कि डार और बाकी आरोपी लश्कर-ए-तैयबा के टच में थे. इस मामले में 250 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे.

गौरतलब है कि 29 अक्टूबर को दिल्ली के सरोजनी नगर, कालकाजी और पहाड़गंज में धमाके हुए थे. धमाके दीपावली से एक दिन पहले हुए थे, लिहाजा पूरा शहर जश्न और खरीददारी में जुटा था. बाजारों में भीड़ थी. बता दें कि इस घटना में 60 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 100 से ज्यादा घायल हुए थे.

पहला धमाका शाम 5:38 बजे पहाड़गंज में हुआ, जिसमें 10 लोगों की मौत हुई और करीब 60 लोग घायल हुए. दूसरा धमाका शाम 6:00 बजे गोविंदपुरी में हुआ, जिसमें 4 लोग घायल हुए और तीसरा धमाका सरोजनी नगर में शाम 6:05 बजे हुआ. इसमें सबसे ज्‍यादा 50 लोगों की मौत हुई थी.

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