पढ़ें, PAK आर्मी चीफ ने अपने अफसरों को भारत से क्या सीखने की नसीहत दी

इस्लामाबाद

पाकिस्तान आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने अपने अफसरों को भारत की मिसाल देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। बाजवा ने कहा- आर्मी का सियासत से कोई लेना-देना नहीं होता। हमारे अफसरों को वो किताब जरूर पढ़नी चाहिए जिसमें बताया गया है कि कैसे इंडियन आर्मी पॉलिटिक्स से दूर रहती है और अपना काम करती है। बता दें कि पाकिस्तान आर्मी का सरकार के कामकाज में दखलंदाजी का इतिहास काफी पुराना है और यहां इसी वजह से कई तख्तापलट भी हो चुके हैं।

और क्या कहा बाजवा ने
– पाकिस्तान के अखबार ‘द नेशन’ ने जनरल बाजवा के इस बयान को पब्लिश किया है। अखबार के मुताबिक, जनरल बाजवा ने आर्मी के रावलपिंडी हेडक्वॉर्टर में सीनियर अफसरों को यह नसीहत दी।
– रिपोर्ट के मुताबिक, बाजवा ने आर्मी अफसरों से कहा- आर्मी का सियासत से कोई वास्ता नहीं होना चाहिए। उसे सरकार के कामकाज में दखल का कोई हक भी नहीं है।
– पाक आर्मी चीफ ने आगे कहा- हमारे अफसरों का भारत में सरकार और आर्मी के रिश्तों पर एक किताब जरूर पढ़नी चाहिए। इसमें बताया गया कि आजादी के बाद कैसे आर्मी को सियासत से दूर रखा गया। सच्चाई तो ये है कि आर्मी का सियासत से कुछ लेना-देना है ही नहीं।
– बाजवा ने ये भी कहा कि आर्मी का जो रोल है वो संविधान में साफ-साफ बताया गया है।

किस किताब का जिक्र कर रहे थे बाजवा?
– पाक आर्मी चीफ ने ‘आर्मी एंड द नेशन’ बुक का जिक्र स्पीच में किया। और अपने अफसरों से इसे पढ़ने के लिए कहा।
– दरअसल, यह बुक अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस और इंटनेशनल रिलेशंस के प्रोफेसर स्टीवन आई. विल्किंसन ने लिखी है। इसमे आजादी के बाद भारत सरकार और भारत की सेना के बीच के रिश्तों को विस्तार से बताया गया है।
– इस किताब में 300 पेज हैं। इसमें बताया गया है कि भारत में डेमोक्रेसी किसी भी नए आजाद मुल्क की तुलना में बेहतर क्यों रही? इसमें ये भी बताया गया है कि सरकार और सेना के बीच दूरी खत्म करने के लिए भारत ने क्या तौर-तरीके अपनाए।

बाजवा का बयान नवाज के लिए राहत?
– आर्मी चीफ का बयान नवाज शरीफ के लिए यकीनन राहत की बात है। दरअसल, पिछले आर्मी चीफ जनरल राहिल शरीफ से उनके रिश्ते तनाव वाले रहे। कहा जाता है कि राहिल एक्सटेंशन भी चाहते थे लेकिन नवाज इसके लिए कभी तैयार नहीं हुए।
– पनामा पेपर लीक मामले में पूरी फैमिली का नाम आना और अपोजिशन के दबाव के बीच आर्मी चीफ का बयान नवाज के लिए राहत की बात तो है ही।

69 साल में से आधा वक्त आर्मी के हाथों में रही सत्ता
– भारत और पाकिस्तान 1947 में एक साथ आजाद हुए। भारत में कभी सेना ने सरकार के काम में किसी तरह का और कोई दखल नहीं दिया। हमारी सेना सिर्फ मुल्क की हिफाजत का काम करती रही। स्टीवन ने अपनी किताब में भारतीय सेना की काफी तारीफ की है।
– दूसरी ओर, पाकिस्तान के इतिहास में आधा वक्त ऐसा गुजरा जब चुनी हुई सरकारों को हटाकर यानी तख्तापलट के जरिए फौजी हुकूमत ने देश चलाया। 2008 में आखिरी बार ऐसा हुआ था।
– आज भी यही माना जाता है कि पाकिस्तान की आर्मी चुनी हुई सरकार से ज्यादा पावरफुल है।

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