4 आतंकियों को ढेर करने वाले मेजर सतीश दहिया को 4 साल की बेटी ने दी मुखाग्नि

नारनौल

जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर में चार आतंकवादियों को ढेर करने वाले मेजर सतीश दहिया भी शहीद हो गए थे. एनकाउंटर में घायल हुए मेजर सतीश दहिया का इलाज चल रहा था, लेकिन उनको बचाया नहीं जा सका.

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नारनौल में उनके पैतृक गांव बनिहाड़ी में बुधवार को शहीद का अंतिम संस्कार किया गया. वहीं, शहीद की चिता उनकी चार साल की बेटी ने मुखाग्नि दी. मेजर सतीश दहिया मां-बाप की इकलौती संतान थे. 2012 में मेजर दहिया की शादी हुई थी.

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जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में मंगलवार को आतंकियों के साथ हुए इनकाउंटर में चार आतंकियों को ढेर करने के दौरान मेजर सतीश जख्मी हो गए थे जिसके बाद इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांसें लीं.

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बता दें कि 22 सितंबर 1985 में गांव बिनहाडी में जन्में मेजर सतीश दहिया का बचपन से सिर्फ एक सपना था कि वो आर्मी ज्वाइन करें. कई नौकरियां दरवाजे पर दस्तक दे रही थीं लेकिन देश सेवा का जुनून ही था कि मेजर दहिया ने आर्मी को चुना.

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मेजर सतीश की शादी 17 फरवरी 2012 को सुजाता देवी के साथ हुई थी. पति की शहादत के बाद पूरा जीवन उनके बगैर काटना पड़ेगा. इस बारे में सुजाता ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा. अब सुजाता के पास सिर्फ मेजर दहिया की यादें हैं और उनकी आखिरी निशानी के तौर पर ये मासूम जिसके सिर से भी पिता का साया उठ चुका है.

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जानने वाले बताते हैं कि मेजर सतीश के अंदर संस्कार और देशप्रेम का जज्बा कूट-कूटकर भरा हुआ था. सबकी मदद करने में वो हमेशा आगे रहते थे. सिर्फ एक परिवार नहीं मेजर सतीश दहिया की शहादत पर पूरा गांव, पूरा प्रदेश और पूरा देश गमगीन है.

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