पढ़ें, कैसे होते हैं DSGMC के चुनाव

गुरुद्वारा एक्ट 1971 के अनुसार दिल्ली में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव करवाने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की होती है। इस तरह इन चुनावों के लिए बाकायदा एक डायरैक्टर नियुक्त किया जाता है। चुनाव के नोटिस पर दिल्ली के उपराज्यपाल के हस्ताक्षर होते हैं। चुनाव के सभी प्रबंध जैसे कि चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति, पुलिस कर्मचारियों व बूथों का प्रबंध गुरुद्वारा चुनाव के डायरैक्टर की देख-रेख में होते हैं। यह डायरैक्टर ही इन चुनावों संबंधी हर फैसला लेता है।

गुरुद्वारा एक्ट 1971 के अनुसार गुरुद्वारा बोर्ड के कुल 55 सदस्य हैं। इनमें से 4 सदस्य तख्तों के जत्थेदार होते हैं जिनके पास कमेटी के लिए वोट डालने का अधिकार नहीं होता है। इस तरह अन्य 51 सदस्यों में से 46 अलग-अलग वार्डों में से चुनाव लड़ते हैं। इनका चुनाव दिल्ली के सिख मतदाताओं द्वारा किया जाता है। 46 सदस्यों की जीत के बाद 55 का आंकड़ा पूरा करने के लिए 5 सदस्य रह जाते हैं।

इनमें से 2 सदस्य दिल्ली की रजिस्टर्ड सिंह सभाओं के प्रधान चुने जाते हैं। इनका चुनाव लॉटरी प्रणाली सिस्टम से होता है। इसको सरकारी अधिकारियों की निगरानी में करवाया जाता है। अन्य रह जाते हैं 3 सदस्य जिनमें 2 को चुनाव जीत कर आए 46 सदस्यों द्वारा चुना जाता है। इस तरह डी.एस.जी.एम.सी. के 55 सदस्यों की संख्या पूरी करने के लिए एक सदस्य रहता है जिसे चुनने का अधिकार गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर के पास होता है।

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