जनवरी में घट गई खुदरा महंगाई दर, पढ़ें कितनी रह गई

जनवरी में खुदरा मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई घटकर 3.17% रह गयी। यह जनवरी 2012 में लॉन्चिंग के बाद से इंडेक्स का सबसे निचला स्तर है। महंगाई में यह गिरावट फूड इन्फ्लेशन में कमी के चलते आयी है। सोमवार को सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) की तरफ से जारी डेटा से यह पिक्चर सामने आयी। इस दौरान कोर इन्फ्लेशन में बढ़ोतरी हुई जो इस बात की तरफ इशारा करती है कि रेट कट की संभावना कम है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले हफ्ते अहम ब्याज दर को जस का तस रहने दिया था। साथ ही उसने 4% के मीडियम टर्म इन्फ्लेशन टारगेट को ध्यान में रखते हुए मॉनिटरी पॉलिसी स्टॉन्स को अकॉमडेटिव से बदलकर न्यूट्रल कर दिया है। महंगाई के आंकड़ों से आरबीआई के रुख में बदलाव आने की संभावना नहीं है। जनवरी में खाद्य महंगाई गिरकर 0.53% रह गयी जो दिसंबर में 1.37% थी। दिसंबर में कन्ज्यूमर इन्फ्लेशन 3.41% थी। फूड और बेवरेजेज के अलावा फ्यूल और लाइट को छोड़ दें तो कोर सीपीआई इन्फ्लेशन जनवरी में बढ़कर 5.1% हो गयी जो दिसंबर 2016 में 4.9% थी। इससे पता चलता है कि महंगाई की नकेल कभी भी हाथ से निकल सकती है।

ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि कन्ज्यूमर इन्फ्लेशन आने वाले समय में बढ़ सकती है क्योंकि महंगाई की ऊंची दर के बेस इफेक्ट का असर घटने लगा है। इकरा की प्रिंसिपल इकॉनमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘बेस इफेक्ट में रिवर्सल और जल्द खराब होने वाली सामग्रियों के दाम में मौसमी बढ़ोतरी से सीपीआई की अगली दो रीडिंग बढ़ सकती हैं। मार्च 2017 में महंगाई 4.5% का लेवल पार कर सकती है।’

आरबीआई ने मार्च 2017 के लिए 5% का इनफ्लेशन टारगेट तय किया है। केयर रेटिंग्स के चीफ इकनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा, ‘नॉन फूड आइटम्स के दाम ऊंचे बने रहेंगे और बेस इफेक्ट का असर घट रहा है। आने वाले दिनों में महंगाई बढ़ती रह सकती है।’ डीमॉनेटाइजेशन के चलते डिपॉजिट में उछाल आने से कई बैंकों ने पिछले महीने अपने इंट्रेस्ट रेट में कमी की थी। इससे कंजम्पशन और हाउजिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद बंधी थी। दिसंबर में इंडस्ट्रियल प्रॉडक्शन 0.4% गिरा। अब फिस्कल इयर 2017 के लिए जीडीपी ग्रोथ अनुमान पिछले फिस्कल के 7.9% से घटाकर 6.5-6.75% कर दिया गया है।

फूड इन्फ्लेशन में कमी आने की वजह सब्जियों में 15.62% का नेगेटिव इन्फ्लेशन रहा। इसके अलावा दाल के दाम में इस दौरान 1.34% कमी आयी, जिससे भी महंगाई घट गयी। हालांकि, जनवरी में चीनी और मिठाईयों के दाम में 18.69% जबकि अनाज के दाम में 4.89% की तेजी आयी। इंडेक्स के नॉन फूड कंपोनेंट्स के दाम में ज्यादा तेजी आयी। कपड़ों और जूते चप्पलों की कीमतों में बढ़ोतरी की दर 4.71% रही जबकि फ्यूल इन्फ्लेशन इस दौरान 3.42% रहा। सीपीआई डेटा के मुताबिक रूरल इंडिया में सालाना रिटेल इन्फ्ले

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