पहली से आठवीं तक के छात्रों की लगेंगी एक्स्ट्रा क्लासिज

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों की अब एक्सट्रा क्लासिज लगाई जाएंगी। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी विषय का ज्ञान बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने यह फैसला लिया है। विभिन्न सर्वे रिपोर्ट में इन विषयों में अधिकांश छात्र कमजोर बताए गए हैं।

इन बच्चों पर अधिक ध्यान देने के लिए विभाग ने एक्सट्रा क्लासिज लगाने की तैयारी है। एक्सट्रा क्लासिज के समय को स्कूल के निर्धारित समय से पहले या बाद में स्थानीय स्तर पर ही तय किया जाएगा। एक्सट्रा क्लास में पढ़ाई में कमजोर रहने वाले विद्यार्थियों को चिन्हित कर पढ़ाया जाएगा। विद्यार्थियों की कमियों पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जाएगा।

शिक्षकों को आसान तरीकों से बच्चों का ज्ञान बढ़ाने के लिए कहा जाएगा। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी को रोचक बनाकर बच्चों में सुधार लाया जाएगा। जिस विषय में अधिक बच्चे पिछड़ रहे हैं वहां विशेषज्ञ शिक्षकों की मदद भी ली जाएगी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों से भी इस योजना के तहत सहयोग लिया जाएगा।

तीन जिलों की सर्वे रिपोर्ट ने चौंकाएं अधिकारी
बीते दिनों प्रदेश के तीन जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पढ़ाई के पिछड़ने के चलते प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने एक्सट्रा क्लास लगाने का फैसला लिया है। शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों के किसी भी शिक्षा ब्लॉक में 60 फीसदी से ज्यादा बच्चों को ए या बी ग्रेड नहीं मिला है।

जिला सिरमौर के दो शिक्षा ब्लॉकों में 60 फीसदी बच्चों को सबसे न्यूनतम डी और ई ग्रेड मिला है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर महीने प्रदेश के स्कूलों के किए जाने वाले निरीक्षण के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट को प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने गंभीरता से लिया है।

एक्सट्रा क्लासिज की करेंगे समीक्षा
शीतकालीन स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र से एक्सट्रा क्लासिज लगाने के आदेश जिला उपनिदेशकों को जारी कर दिए गए हैं। एक्सट्रा क्लास लेने वाले शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर भी नजर रखी जाएगी। देखा जाएगा कि एक्सट्रा क्लास लगाने से कितने बच्चों ने बेहतर परिणाम दिया। हर माह इसकी समीक्षा की जाएगी। अगर परिणाम संतोष जनक नहीं रहे तो शिक्षकों से जवाबतलबी की जाएगी। -मनमोहन शर्मा, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक

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