भारत की न्यूक्लियर पावर बढ़ने से PAK की हालत पतली

इस्लामाबाद

नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने हिंद महासागर में भारत की बढ़ती मौजूदगी पर चिंता जताई है। अजीज ने कहा कि इस इलाके में शांति खत्म करने की कोशिश हुई तो पाकिस्तान करारा जवाब देगा। उन्होंने भारत पर हिंद महासागर का ‘न्यूक्लियराइजेशन’ करने का भी आरोप लगाया।

मैरीटाइम कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे अजीज
– पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक, अजीज रविवार को कराची में हुई इंटरनेशनल मैरीटाइम कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे।
– उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के न्यूक्लियराइजेशन से यह इलाका डिस्टैब्लाइज हुआ है। फ्यूचर में यह खतरा और बढ़ेगा।
– अजीज ने कहा कि हिंद महासागर में मिलिट्राइजेशन, बेहद खतरनाक हथियारों को जुटाना, मिसाइल कैपिबिलिटीज को बढ़ाना और विदेशी सेना की मौजूदगी शांति के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां हैं।
– उन्होंने कहा कि इनके अलावा इस इलाके में समुद्री डकैतियां, गैरकानूनी मछली पकड़ना, मानव-ड्रग्स-हथियारों की तस्करी, पॉल्युशन और क्लाइमेट चेंज समुद्र से जुड़ी बड़ी चुनौतियां हैं।
इंडियन नेवी पर दखल बढ़ाने का आरोप
– अजीज ने कहा कि इंडियन नेवी का हिंद महासागर में बढ़ता दखल पाकिस्तान के लिए चिंता की बात है।
– उन्होंने कहा, “हिंद महासागर की सिक्युरिटी पाकिस्तान के लिए स्ट्रैटजिक इम्पॉर्टेंस रखती है।”
– “हमें हिंद महासागर की इकोनॉमिक कैपिबिलिटीज का अंदाजा हुआ।”
– “यह दुनिया के 30 से ज्यादा देशों को समुद्र तट मुहैया कराता है।”
– “यह न सिर्फ एशिया के अहम इलाकों को कनेक्टिविटी देता है, बल्कि साउथ एशिया, मिडल-ईस्ट, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप को जोड़ता है।”
– “ऐसे में, सिक्युरिटी को लेकर सभी पक्षों के बीच रेग्युलर बातचीत होनी चहिए। यह बेहद जरूरी है।”
हम अपनी कैपिबिलिटीज पर ध्यान देंगे
– अजीज ने कहा कि आने वाले वक्त में समुद्र में इस तरह ताकत जुटाने का चलन और बढ़ने वाला है।
– उन्होंने कहा कि हमें अपने देश की भलाई का अंदाजा है और हम हिंद महासागर में अपनी कैपिबिलिटीज को और मजबूत करने पर ध्यान देंगे।
अमेरिकी मैगजीन ने भी लगाया भारत पर आरोप
– बता दें कि हाल ही में अमेरिका की मैगजीन फॉरेन पॉलिसी ने दावा किया था कि भारत मैसूर के पास चलकेरे में न्यूक्लियर शहर डेवलप कर रहा है।
– यह भी दावा था कि यह शहर 2017 तक बनकर तैयार हो जाएगा और भारत चीन और पाकिस्तान को पीछे छोड़ने के लिए ऐसा कर रहा है।
– हालांकि, बाद में भारत के एटॉमिक एनर्जी डिपार्टमेंट के सूत्रों ने इन दावों को खारिज कर दिया।
– उनका कहना है कि यह महज इत्तेफाक है कि कर्नाटक सरकार की ओर से अलॉट की गई जमीन पर पास-पास कई टॉप इंस्टीट्यूट्स बनाए जा रहे हैं।

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