अगर ऐसा हुआ तो, फेसबुक के CEO नहीं रहेंगे जुकरबर्ग

दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नैटवर्किंग कंपनी फेसबुक के फाऊंडर और सी.ई.ओ. मार्क जुकरबर्ग को बोर्ड ऑफ डायरैक्टर पद से हटाने के लिए शेयरहोल्डर्स एक प्रस्ताव लाए हैं। मार्क जुकरबर्ग को हटाने के लिए लाए गए इस प्रस्ताव में वे शेयरहोल्डर्स शामिल हैं जो एक ऑनलाइन कंज्यूमर वॉचडॉग ‘सम ऑफ अस’ के भी सदस्य हैं। इनका मानना है कि एक शख्स को सी.ई.ओ. और बोर्ड ऑफ  डायरैक्टर का सदस्य होना ऑर्गेनाइजेशन के लिए ठीक नहीं है और इससे शेयरहोल्डर्स को परेशानी हो सकती है।

इन शेयरहोल्डर्स की यह है दलील
वैंचरबीट की एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘सम ऑफ अस’ की कैपिटल मार्कीट एडवाइजर लीजा लिंड्सली ने कहा है कि फेसबुक को अपने कॉर्पोरेट सिटीजनशिप में सुधार करने के लिए लगभग 3 लाख 33 हजार लोगों ने पटीशन साइन की है। हालांकि इनमें से 1,500 लोग फेसबुक के ही शेयरहोल्डर्स हैं। इन शेयरहोल्डर्स की दलील यह भी है कि किसी भी ऑर्गेनाइजेशन की मांग पर एक शख्स के पास चेयरपर्सन, बोर्ड ऑफ डायरैक्टर और सी.ई.ओ. का पद होना दूसरे शेयरहोल्डर्स के लिए ठीक नहीं है। उनके मुताबिक इसे कंपनी के लोकतंत्र में भी दिक्कतें आती हैं।

इस प्रस्ताव में उन शेयरहोल्डर्स ने इंटैल के को-फाऊंडर और सी.ई.ओ. एंड्रू ग्रोव का एक स्टेटमैंट लिखी है। इसके मुताबिक कंपनी का सी.ई.ओ. वहां का बॉस कैसे हो सकता है, क्योंकि अगर वह कर्मचारी है तो उसे बॉस की जरूरत होगी जो बोर्ड ऑफ डायरैक्टर में मौजूद है और कायदे से चेयरमैन बोर्ड चलाता है। ऐसी स्थिति में कोई सी.ई.ओ. खुद का बॉस कैसे हो सकता है।

इस प्रस्ताव का मार्क जुकरबर्ग पर नहीं पड़ेगा असर
हालांकि इन शेयरहोल्डर्स से मार्क जुकरबर्ग को ज्यादा फर्क इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके पास कंपनी के सबसे ज्यादा शेयर्स हैं। ऐसे में वे दूसरे बोर्ड ऑफ डायरैक्टर्स और निवेशकों के साथ मिलकर इस आवेदन को खारिज कर सकते हैं। 2012 से मार्क जुकरबर्ग फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरैक्टर में शामिल हैं और तब से कंपनी लगातार कमाई कर रही है। फिलहाल फेसबुक के 1.86 बिलियन यूजर्स हैं। इसके अलावा फेसबुक न सिर्फ  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बल्कि वर्चुअल रिएलिटी की दुनिया में भी खुद को स्थापित कर रही है।

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