किसी को मालूम ही नहीं यूपी में कितनी इंडस्ट्रीज हैं, तो कैसे साफ होगी गंगा

गंगा की सफाई को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में हो रही लगातार सुनवाई के दौरान प्राधिकरणों की ओर से इंडस्ट्री की संख्या को लेकर अब भी पसोपेश की स्थिति है। याची का आरोप है कि यूपी में कुल 1.82 लाख इंडस्ट्री मौजूद हैं, जबकि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि वह दावे और पूरे भरोसे के साथ कह रहे हैं कि यूपी में कुल 6385 उद्योग हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मानें तो गंभीर प्रदूषण फैलाने वाले सिर्फ 700 उद्योग यूपी में मौजूद हैं। वहीं पीठ ने कहा कि वह कौन सी एक सरकारी एजेंसी है जो सही आंकड़े दे पाएगी। आपके जवाब देने वाले सारे अधिकारी नदारद हैं। यह हास्यास्पद है।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को एमसी मेहता मामले पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि बृहस्पतिवार को उद्योग विभाग के निदेशक उद्योगों की कुल संख्या के स्पष्ट आंकड़े दें। वहीं उत्तर प्रदेश की ओर से पेश एडवोकेट जनरल विजय बहादुर सिंह से पीठ ने कहा कि वह उद्योगों के जरिए उत्पादित होने वाले सीवेज का आंकड़ा और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं के संबंध में जानकारी दें।

सुनवाई के दौरान 1 लाख 82 हजार उद्योग होने के आरोप पर यूपी के एडवोकेट जनरल ने कहा कि यदि यह संख्या सही होती तो यूपी अमेरिका हो जाता। वहीं पीठ ने उद्योग विभाग की ओर से निदेशक के पेश न होने पर फटकार भी लगाई।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की हकीकत
​पीठ ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की ओर से पेश अधिकारी के जरिए जाजमऊ में उद्योगों के प्रदूषण पर रोक को लेकर तकनीकी अपनाने और सिफारिश देने पर अपना पक्ष देने को कहा।

नएमसीजी के कार्यकारी निदेशक ने पीठ को बताया कि जाजमऊ में कुल 400 टैनरीज हैं। इन टैनरीज के जरिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज फॉर्मूला अपनाया गया है।

वहीं पीठ ने पूछा कि इन टैनरीज के जरिए निकलने वाले सॉल्ट का क्या किया जा रहा है। इसको स्टोर किए जाने जाने के बाद क्या यह अध्ययन किया गया कि इससे भू-जल, नदी और वायु प्रदूषण हो रहा है, और उसका कितना प्रभाव है। इस पर एनएमसीजी के अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचने लगे। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि आप तकनीकी व्यक्ति से ज्यादा ब्यूरोक्रेट हैं। मामले पर सुनवाई जारी रहेगी।

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