राजीव गुप्ता ने किया साबित, ‘मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है’

सोलन

अक्षम होने के बावजूद भी देश के करीबन 300 धुरंधर शूटरों को पछाड़ कर सोलन के राजीव गुप्ता ने मिसाल कायम की है। दिल्ली में आयोजित ओपन चैंपियनशिप में 49 वर्षीय राजीव गुप्ता ने गोल्ड मैडल हासिल कर साबित कर दिया है कि अगर कुछ कर गुजरने का जनून हो तो शारीरिक अक्षमता भी आड़े नहीं आती है। राजीव गुप्ता का आज से करीबन 20 साल पहले दुर्घटना के बाद शरीर के निचले हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था। उसके बाद शूटिंग की तमन्ना को उन्होंने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया और इसमें उनकी धर्म पत्नी ने भरपूर साथ दिया और यही वजह है कि राजीव अक्षम होने के बावजूद भी नोर्मल खिलाड़ियों को पछाड़ कर आज चैंपियन बने हैं।

राजीव गुप्ता ने किया साबित, 'मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है'
महिला शूटर को हरा कर हासिल किया गोल्ड मैडल  
बताया जा रहा है कि जीत के बाद सोलन में पहुंचे राजीव गुप्ता का लोगों ने खूब स्वागत किया। इस मौके पर राजीव ने बताया कि वह 300 खिलाड़ियों को पछाड़ कर एलिमिनेशन राउंड में भी खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देते हुए आगे बढ़ते रहे और अंत में शारीरिक रूप से बलवान हरियाणा की 18 वर्षीय एक महिला शूटर से उनका मुकाबला हुआ और उसे हरा कर उन्होंने गोल्ड मैडल हासिल किया। उन्होंने कहा कि अब वह वल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर जीत हासिल करना चाहते हैं।

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