अब दिल्ली पुलिस एक बार में सुन सकेगी 120 कॉल्स, जानिए कैसे

नई दिल्ली
संदिग्धों और आरोपियों की फोन पर होने वाली बातचीत पर नजर रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां कॉल इंटरसेप्शन या टैपिंग का सहारा लेती हैं। इसी क्रम में आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों की जांच करने वाली दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अपनी फोन टैपिंग की तकनीक को और बेहतर करने का फैसला किया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वे अडवांस्ड लॉ एनफोर्समेंट मॉनिटरिंग फैसिलिटीज (LEMF) खरीदने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। यह एक बेहद खुफिया प्रॉजेक्ट है, जिसे प्राथमिकता देकर पूरा किया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, नया एलईएमएफ सिस्टम पुलिसवालों को एक साथ 120 कॉल्स सुनने की सहूलियत देगा। जो नया सिस्टम बनाया जा रहा है, वह महज एक सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं होगा। यह करीब 100 कंप्यूटर और हाईस्पीड सर्वरों से बना नेटवर्क होगा। इन सिस्टम में बेहद शक्तिशाली 128जीबी डीडीआर4 रैम लगे होंगे। मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस सिस्टम को चलाने में करोड़ों रुपये खर्च होंगे।

स्पेशल सेल की नई दिल्ली रेंज को इस सिस्टम का अधिकतर हिस्सा इस्तेमाल के लिए मिलेगा। उन्हें 36 कंप्यूटर और सर्वर मिलेंगे। वहीं, संगठित अपराध के मामलों पर नजर रखने वाले साउथ वेस्ट और नॉर्दर्न रेंज को 20-20 सिस्टम मिलेंगे। सर्दर्न रेंज को 15 कंप्यूटर मिलेंगे। दिल्ली पुलिस हेडक्वॉटर्स पर पांच कंप्यूटर और सेंट्रल सर्वर का बना सेटअप तैयार किया जाएगा। इस सिस्टम की देखरेख स्पेशल सेल के डीसीपी करेंगे।

माना जा रहा है कि इस सुविधा का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए केंद्रीय निगरानी की व्यवस्था होगी। हालांकि, फिलहाल यह साफ नहीं है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रॉजेक्ट को हरी झंडी दी है कि नहीं। बीते साल गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस की ओर से फोन टैपिंग की मंजूरी देने से जुड़ी मांगों में इजाफा होने पर आपत्ति की थी। साथ ही उन सैकड़ों नंबरों को लेकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी, जिनकी टैपिंग के लिए उसने इजाजत दी थी।

प्रोटोकॉल के तहत, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, राज्यों के डीजीपी, इंटेलिजेंस ब्यूरो, रॉ, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, सीबीआई, एनआईए, डिफेंस मिनिस्ट्री की मिलिट्री इंटेलिजेंस और सीबीडीटी को कॉल इंटरसेप्शन की इजाजत है। हालांकि, ऐसा करने से पहले गृह मंत्रालय की इजाजत लेनी होती है।

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