BHIM App नहीं रहा सुरक्षित, हैकरों ने उड़ाए 1 लाख रुपए

कानपुर

नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ज्यादा से ज्यादा कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए कई एप लांच किए हैं. इनमें से एक है भीम एप, जिसे एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है.

अब साइबर ठगों ने इसका दुरूपयोग करते हुए कानपुर के एक ट्रांसपोर्टर के अकाउंट से एक लाख से अधिक की रकम निकाल लिए. यह मामला कानपुर दक्षिण बाबूपुरवा का है. बाबूपुरवा नई मस्जिद के पास रहने वाले आफताब आलम मित्र अली नकवी के साथ पार्टनरशिप में ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं.

आफताब और अली का किदवई नगर मार्बल मार्केट स्थित एक्सिस बैंक में ज्वाइंट बैंक अकाउंट है. आफताब ने बताया कि उन्होंने अपने मोबाइल पर नेट बैंकिंग सर्विस एक्टिवेट की है. शनिवार को उनके मोबाइल में 5000 रुपए निकलने का मैसेज आया और फिर उनका नंबर बंद हो गया.

जब सोमवार को बैंक पहुंचकर उन्होंने पासबुक अपडेट कराई तो उनके होश उड़ गए. उनके अकाउंट से 105000 रुपए निकल चुके थे. आफताब ने बताया कि किसी ने भीम एप के माध्यम से 9 बार में ये रकम निकाल लिए. जब ये रकम निकाली गई तो उस समय उनका सिम बंद था.

अफताब ने बताया कि शनिवार से उनका सिम बंद पड़ा है. उन्होंने टेलीकॉम कंपनी में जाकर शिकायत की तो पता चला कि शनिवार को उनका नंबर बंद करके दूसरा सिम बनारस में एक्टिवेट किया गया. सिम से कोई कॉल नहीं की गई है. केवल मैसेज के लिए ही उपयोग किया गया है.

नाम न छापने की स्थिति में एक साइबर एक्सपर्ट ने न्यूज़18 को बताया कि पूरा मामला सिम क्लोनिंग की तरह ही है, लेकिन यह पॉसिबल नहीं है. अभी तक इंडिया में ऐसा मामला देखने में नहीं आया है.

यह जरूर संभव है कि टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर की मदद से दूसरा सिम एक्टिवेट कर लिया गया हो और इसके बाद इस फ्रॉड को अंजाम दिया गया हो. इसमें किसी न किसी सर्विस प्रोवाइडर कर्मचारी की मिलीभगत हो सकती है और पीड़ित का कोई करीबी भी हो सकता है जिसने आइडेंटिटी प्रूफ प्रोवाइड कराया हो.

यह संभव है कि साइबर ठगों ने सिम खोने की फर्जी एफआईआर दिखाकर दूसरा सिम ले लिया हो, लेकिन उसे एक्टिवेट कराने के लिए आइडेंटिटी प्रूफ और फोटो देना होता हैं. इसके बाद उसे कस्टमर एप्लीकेशन फॉर्म से मैच कराया जाता है. सब कुछ मिलने की स्थिति में ही सिम एक्टिवेट होता है.

एक्सपर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में ऐसे फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं, लिहाजा सरकार को मोबइल कंपनियों के लिए एक गाइडलाइन लाना चाहिए. आज मार्केट में कुछ कंपनियों को छोड़ दें तो तमाम तरह के एंड्राइड बेस्ड मोबाइल फोन की भरमार हैं, जिनकी सिक्योरिटी फीचर ओपन होते हैं.

इस वजह से इन फोन में वायरस के अटैक का खतरा बना होता है और कोई भी आपके फ़ोन से पासवर्ड हैक कर सकता है. सरकार को चाहिए कि वे सभी एंड्राइड फोन बनाने वाली कंपनियों को 128 बिट सिक्योरिटी फीचर को फोन में रखना अनिवार्य करे. कई बैंकिंग कंपनियां इसका प्रयोग करती हैं.

इसके अलावा, यह भी तय करना होगा कि भीम जैसे जितने भी एप्लीकेशन हैं वे उन मोबाइल में डाउनलोड नहीं हो सकें, जिनका सिक्योरिटी फीचर ओपन हो.

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