मिड डे मील वर्कर्स के साथ धोखा, पढ़ें

विधानसभा चुनाव में चुनाव कमीशन की तरफ से बेहतर प्रयत्न किए गए थे, जिसके तहत सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों को चुनावी ड्यूटी के लिए मेहनताने के तौर पर काफी अच्छी रकम मिली, लेकिन स्कूल में काम कर रहे मिड डे मील वर्करों को कोई पैसा नहीं मिला। उल्टा उन्होंने चुनाव कर्मचारियों के लिए दो दिन के लिए राशन तैयार किया और उसके पैसे भी अपनी जेब से खर्च किए।

अलग-अलग गांवों और बूथों से एकत्रित जानकारी के अनुसार 3 फरवरी की शाम को चुनाव बूथों पर चुनाव कर्मचारी और सुरक्षा कर्मचारी पहुंच गए थे, जिनके लिए मिड डे मील कर्मचारियों ने रोटी और चाय का प्रबंध किया।

मिड डे मील वर्करों को इसके लिए कोई पैसा एडवांस में नहीं दिया गया, बल्कि केवल 1200 रुपये मासिक वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों ने अपनी जेब से पैसे खर्च करके या दुकानदारों से उधारी लेकर इस जिम्मेदारी को निभाया। इस संबंध में कुछ स्कूलों की मिड-डे-मील वर्करों ने बताया कि उनको बाकी मुलाजिमों की तरह कोई अतिरिक्त मेहनताना नहीं दिया गया जबकि उनको दो दिन ड्यूटी देनी पड़ी।

वहीं, पंजाब सबोर्डिनेट सर्विस के नेता उत्तम मिन्हास का कहना है कि चुनाव कमीशन द्वारा इन गरीब वर्करों के साथ धक्का किया गया है। वे लोग बहुत कम वेतन के चलते इतना बड़ा खर्च करने के काबिल नहीं थे। कई स्थानों पर कर्मचारियों को पैसे नहीं मिले हैं।

मिड डे मील वर्कर यूनियन तथा अध्यापक यूनियन के नेता बलविंदर सिंह ने कहा कि बूथ पर काम करते बीएलओ की जिम्मेदारी राशन के लिए लगाई गई थी। सुपरवाइजर ने चुनाव खत्म होने के बाद मिड डे मील कर्मचारियों को अदायगी करनी थी। अगर कोई ऐसी लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार संबंधित बीएलओ तथा सुपरवाइजर जिम्मेदार हैं। मिड डे मील वर्करों ने जिला प्रशासन से मांग की कि खर्च की गई रकमों की अदायगी तुरंत की जाए।

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