पढ़ें, शशिकला के सामने क्या हैं चुनौतियां, लोगों के दिलों पर कर पाएंगी राज ?

शशिकला नटराजन तमिलनाडु की नई सीएम होंगी। जयललिता के निधन के ठीक दो महीने बाद रविवार को हुई AIADMK विधायक दल की मीटिंग में उन्हें नेता चुना गया। इसके बाद मौजूदा सीएम पन्नीरसेल्वम ने अपना इस्तीफा गवर्नर को भेज दिया। वे 9 महीने में तमिलनाडु की तीसरी सीएम होंगी। शशिकला ने कभी वीडियो पार्लर चलाने से लेकर अब सीएम चुने जाने तक का सफर तय कर लिया है लेकिन उनके सामने कई चैलेंज आ सकते हैं। वे जयललिता जैसी लोकप्रिय नहीं हैं। उनके जैसा जन समर्थन नहीं है। इतना ही नहीं, उन पर जयललिता को जहर देने का आरोप भी लग चुका है।

क्या हैं शशिकला के सामने 5 चुनौतियां

1. जयललिता जैसी लोकप्रियता नहीं, इसलिए मुश्किल ज्यादा
– शशिकला का प्लस प्वाइंट सिर्फ जया की करीबी होना है। जया जैसा जनाधार और स्टेट्समैनशिप यानी सियासी गुर उनके पास नहीं है।
– गांवों और गरीबों में बेहद कम फेस वैल्यू है। चुनाव में कार्यकर्ताओं के साथ ट्यूनिंग बेहद मुश्किल होगी।
– शशिकला थेवर समुदाय से हैं, जो बड़ा वोट बैंक है। पन्नीरसेल्वम भी थेवर हैं। शशिकला को कम फायदा होगा।

2. चुनाव तक फूट को रोकना होगा
– शशिकला पहले भी पावर सेंटर थीं। अभी विधायक चुनाव नहीं चाहते। उनके पास अभी जिताऊ चेहरा नहीं है। लेकिन साढ़े 3 साल बाद चुनाव हैं।
– थंबीदुरई, पन्नीरसेल्वम, वीएस चंद्रलेखा जैसे बड़े चेहरे विद्रोह कर सकते हैं। संभव है ये जया की रिश्तेदार दीपा के नेतृत्व में नया मोर्चा खोल दें।

3. 45 साल पुरानी पार्टी की तीसरी बड़ी नेता बन पाएंगी?
– जया की मौत के 62 दिन बाद ही शशिकला सत्ता के शीर्ष पर पहुंच गईं। जबकि जया को एमजीआर की मौत के 13 महीने बाद पार्टी का सबसे बड़ा पद मिला था।
– 1972 में एमजीआर ने डीएमके से अलग हो अन्नाद्रमुक बनाई थी। दाे ही नेता रहे। एमजीआर और जया। 45 साल बाद पार्टी में अब शशिकला तीसरा बड़ा चेहरा होंगी। लेकिन उन्हें एमजीआर और जया जैसे अपना राजनीतिक कद बढ़ाना होगा।

4. वोटरों के बीच निगेटिव इमेज से बचना होगा, कभी लगा था जहर देने का आरोप
– शशिकला दो दशक तक जयललिता की परछाईं की तरह रहीं। लेकिन 2011 में आरोप लगा कि शशिकला ने पति नटराजन को सीएम बनाने के लिए जयललिता को धीमा जहर देकर मारने की कोशिश की।
– इसके बाद जयललिता ने शशिकला को अपने घर और पार्टी से निकाल दिया। यह अलगाव 100 दिन चला। शशिकला के माफी मांगने पर जयललिता ने उन्हें दोबारा दोस्त के तौर पर अपना लिया।
– जब जयललिता का निधन हुआ तो शशिकला ने ही भतीजे दीपक के साथ अंतिम संस्कार की रस्में निभाई। सीएम पन्नीरसेल्वम की बजाय शशिकला अम्मा के ज्यादा नजदीक नजर आईं।
– वोटरों के बीच यही इमेज मजबूत करनी होगी।

5. DMK से सीधी लड़ाई, स्टालिन से मुकाबला और BJP से चुनौती
– शशिकला को डीएमके के वर्किंग प्रेसिडेंट एमके स्टालिन से कड़ी टक्कर मिलेगी। स्टालिन का कहना है कि शशिकला लोगों की इच्छा के विरुद्ध सीएम बन रही हैं। जनता हो या जयललिता, शशिकला किसी की पसंद नहीं हैं।
– शशिकला के सामने चुनौती बीजेपी की तरफ से भी आ सकती है। पन्नीरसेल्वम के सीएम बनने तक बात ठीक थी, लेकिन शशिकला का सीएम बनना बीजेपी को परेशानी में डाल सकता है। जयललिता के निधन के बाद बीजेपी उम्मीद कर रही थी कि वे एआईएडीएमके को आसानी से अपने पाले में कर सकती है।

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