ट्रेन में चोरी हुआ पर्स, रेलवे को 1.41 लाख चुकाने का आदेश

इंदौर

उज्जैन की जिला उपभोक्ता फोरम ने भारतीय रेलवे को आदेश दिया है कि वह सेवाओं में खामियों के लिए एक यात्री को 1.41 लाख रुपये का भुगतान करे. दरसअल अरविंद सिंह जब 2013 में ट्रेन से यात्रा कर रहे थे तो एक चोर चलती ट्रेन से उनके आभूषण और बैग चुराकर फरार हो गया.

फोरम के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह और मेंबर पुरषोत्तम तिवारी ने पश्चिम रेलवे के क्षेत्रीय प्रबंधक को अगले दो महीनों के अंदर याचिकाकर्ता अरविंद सिंह चंदेल को 1.41 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा है. यदि इसमें देरी होती है तो रेलवे को 25 अगस्त, 2013 की तारीख से इसमें 7 फीसदी की ब्याज दर के हिसाब से भुगतान करना होगा.

चंदेल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि वह 16 फरवरी 2013 को देहरादून एक्सप्रेस ट्रेन (19019) से यात्रा कर रहे थे. एक चोर उनके एस1 कंपार्टमेंट में आया और उनकी पत्नी रेखा चंदेल ने अपने तकिये के नीचे जो बैग रखा था वह उसे चुराकर भाग गया. चंदेल किसी शादी में शामिल होने के लिए जा रहे थे. इस बैग में 1.27 लाख रुपये के गहने, 1450 रुपये का फोन तथा 10 हजार रुपये की नकदी थी.

पीड़ित ने उसके बाद चोर का पीछा किया लेकिन वह (चोर) चलती ट्रेन से कूद गया. उसके बाद उन्होंने निजामुद्दीन रेलवे पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई।याचिकाकर्ता के वकील प्रताप सिंह रावत ने दलील दी है कि रेलवे कंपार्टमेंट में यात्रा कर रहे यात्रियों को सुरक्षा मुहैया कराने में असफल रहा है. कोच में आपातकालीन चेन भी कार्य नहीं कर रही थी और रेलवे स्टाफ भी सहायता करने के लिए मौजूद नहीं था. वकील ने दावा किया कि कई और सुरक्षा खामियां भी रेलवे में मौजूद थी.

पश्चिम रेलवे ने दावा किया था कि उसका सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) पर कोई नियंत्रण नहीं है और रेलवे की धारा 100 के तहत रेलवे के पास केवल बुक सामान की जिम्मेदारी होती है. उपभोक्ता अदालत ने रेलवे की दलील को खारिज कर दिया और याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया. अदालत ने रेलवे को अदालती कार्रवाई में हुए खर्च के लिए याचिकाकर्ता को 2000 रुपेय का भुगतान करने को कहा है.

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