कश्मीर के दो खिलाड़ियों को नहीं मिला US का वीजा, पढ़ें क्यों

स्कीइंग करने वाले कश्मीर के दो एथलीट ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने अपनी मौजूदा नीति के चलते उन्हें वीजा देने से इनकार कर दिया। न्यूयॉर्क के सारनक लेक गांव के मेयर क्लाइड रेबिड्यू ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘अमेरिका की मौजूदा नीति के चलते भारतीय स्नोशूअर्स को वीजा देने से मना कर दिया गया। यह कश्मीर से हमारे अच्छे मित्र आबिद खान की ओर से कुछ मिनट पहले फेसबुक मैसेज में बताया गया।’ जिन दो खिलाड़ियों को वीजा देने से मना किया गया है उनके नाम आबिद खान और तनवीर हुसैन हैं। वे दोनों 24-25 फरवरी को न्यूयॉर्क में 2017 की वर्ल्ड स्नोशू चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले थे।

हालांकि, इस बारे में फिलहाल अमेरिकी दूतावास अधिकारियों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है। उनसे इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया था। खान ने वीजा नहीं मिलने के बारे में फेसबुक पर चर्चा के दौरान रेबिड्यू को बताया। उन्होंने मेयर को लिखा, ‘माफ कीजिएगा सर, वीजा देने से इनकार कर दिया गया।’ खान ने दावा किया कि दोनों खिलाड़ियों के पास सभी कागजात दुरुस्त थे। उन्होंने बताया, ‘नयी दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की महिला अधिकारी सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद दूसरे कमरे में गई। लौटने पर उन्होंने कहा कि ‘माफ कीजिएगा, हमारी मौजूदा नीति के मुताबिक हम आपको वीजा नहीं दे सकते।’ बहरहाल, टिप्पणी के लिए खिलाड़ियों से संपर्क नहीं हो सका।

इससे पहले सात मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध के शासकीय आदेश का बचाव करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (30 जनवरी) को जोर देकर कहा कि ‘यह प्रतिबंध मुस्लिमों पर नहीं है’ जैसा कि मीडिया द्वारा गलत प्रचार किया जा रहा है। ट्रंप ने शुक्रवार (27 जनवरी) को उस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे जिसके चलते सीरिया के शरणार्थियों समेत छह अन्य देशों के लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर पाबंदी लग गई। उनके इस कदम की खासी आलोचना हुई। इन सात देशों में इरान, ईराक, लीबिया, सूडान, यमन, सीरिया और सोमालिया हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह मुस्लिमों पर प्रतिबंध नहीं है जैसा कि मीडिया गलत प्रचार कर रहा है। यह धर्म के बारे में भी नहीं है। यह आतंकवाद और हमारे देश को सुरक्षित रखने को लेकर है। दुनिया भर में 40 से अधिक देश मुस्लिम बहुल हैं जो इस आदेश से प्रभावित नहीं होंट्रंप ने कहा अमेरिका जब आश्वस्त हो जाएगा कि अगले 90 दिनों में यहां सर्वाधिक सुरक्षित नीतियां लागू हो चुकी हैं और उनकी समीक्षा की जा चुकी है तब सभी देशों के लोगों के लिए वीजा फिर से जारी किए जाने लगेंगे। उन्होंने एक वक्तव्य में कहा, ‘सीरिया में भयावह मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों के प्रति भी मेरी भावनाएं हैं लेकिन मेरी सर्वप्रथम प्राथमिकता हमेशा ही हमारे देश की सुरक्षा और सेवा रहेगी। हालांकि राष्ट्रपति होने के नाते मैं उन पीड़ित लोगों की मदद करने के तरीके भी खोज निकालूंगा।’ अमेरिका को प्रवासियों का एक गौरवान्वित राष्ट्र बताते हुए ट्रंप ने कहा कि देश दमन के शिकार और इससे बचकर भाग रहे लोगों के प्रति दया दिखाता रहेगा लेकिन वह ऐसा अपने नागरिकों और सीमा की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए करेगा।

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