पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ‘स्टेट ऑफ इकॉनमी’ रिपोर्ट पेश की

कांग्रेस ने बजट से पहले केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह फेल होने का आरोप लगाया है। यहां पर कांग्रेस ने एक आर्थिक डॉक्युमेंट जारी करते हुए इकनॉमिक मोर्चे पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। इसके साथ ही कांग्रेस ने विजय माल्या के साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के बीच हुए पत्राचार के बीजेपी के आरोपों पर भी जवाब दिया।

पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा, ‘वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में नहीं है और वर्तमान एनडीए सरकार आर्थिक मोर्चों पर असफल साबित हुई है।’ पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, ‘हमारे द्वारा जो डॉक्युमेंट पेश किए जा रहे हैं उनमें भारत की अर्थव्यवस्था की हालत की चर्चा की गई है। यह रिपोर्ट पूरी रिसर्च और आर्थिक आकड़ों के साथ यह साबित करती है कि सरकार लोगों को भ्रम में डाल रही है।’

वहीं, माल्या को मदद करने के बीजेपी के आरोपों पर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने कहा, ‘यह सभी लेटर्स सामान्य थे और इसमें कुछ भी गलत या गैरकानूनी नहीं किया गया।’ उन्होंने कहा, ‘सामान्य तौर पर कई उद्योगपति प्रधानमंत्री कार्यालय और मंत्रालयों को चिट्ठियां लिखते हैं जिन्हें आगे संबंधित अधिकारियों को भेज दिया जाता है।’

इस बीच, सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए चिदंबरम ने कहा, ‘जिस तरह सरकार अपनी आर्थिक सफलता के दावे कर रही है तो सरकार को बताना चाहिए कि नए रोजगार के अवसर कहां हैं?, नया पूंजी निवेश क्यों नहीं आया? बिजनस की संभावनाएं कैसे बढ़ेंगी?’ चिदंबरम ने कहा, ‘यूपीए की सरकार ने अपने कार्यकाल में 7.5 पर्सेंट के औसत से जीडीपी ग्रोथ रेट बनाए रखी थी और लगभग 4 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला था। वर्तमान सरकार को पूर्ववर्ती सरकार को इस मामले में पीछे छोड़ना चाहिए था लेकिन इन्होंने जीडीपी के बेस इयर और आंकड़ों में हेर-फेर कर जीडीपी को बढ़ाकर दिखाने का प्रयास किया।’

उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया पिछले दो साल में आर्थिक ग्रोथ रेट और नवीन रोजगार सृजन की दर लगातार कम हो रही है। चिदंबरम ने कहा, ‘हाल में लेबर ब्यूरो ने बताया है कि पिछले साल जुलाई-सितंबर की तिमाही में केवल 77,000 नए रोजगारों का सृजन हुआ जिसमें से 50 हजार रोजगार सरकारी क्षेत्र के थे। वहीं, क्रेडिट ग्रोथ रेट भी 5 पर्सेंट के निचले स्तर पर है जो पिछले कई दशकों में न्यूनतम है।’

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