रोक के बावजूद हिमाचल सरकार ने प्रतिबंधित तेल छिड़काव को मंजूरी दी

सेब बगीचों में फंगस संक्रमण रोकने के लिए हिमाचल में प्रतिबंधित तेल के छिड़काव को मंजूरी देने पर विवाद खड़ा हो गया है। इस फै सले से केंद्र सरकार और हिमाचल सरकार के बीच टकराहट के हालात पैदा हो गए हैं। जम्मू-कश्मीर सरकार के फैसले को आधार बनाकर राज्य सरकार ने यह मंजूरी अपने स्तर पर दे दी है। केंद्र सरकार ने ट्री स्प्रे ऑयल (टीएसओ) के छिड़काव पर रोक लगाई है, क्याेंकि केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण एजेंसी में यह दर्ज नहीं है।

बागवानों के दबाव के बावजूद राज्य सरकार दशकों से किसी भी तेल कंपनी से टीएसओ का पंजीकरण करवाने में असफल रही है। नतीजतन, हाल ही में केंद्र की अधिक सख्ती के बावजूद टीएसओ बिक्री और इसके छिड़काव को राज्य सरकार ने अपने स्तर पर मंजूरी दे दी। केंद्रीय कानून के मुताबिक किसी भी ऐसी सामग्री का सेब या अन्य फसलों के पेड़-पौधों पर छिड़काव नहीं हो सकता, जिसका मनुष्य, पशुओं, पर्यावरण पर विपरीत असर का आकलन नहीं हो।

यह आकलन केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण एजेंसी लंबे प्रयोग के बाद करती है। इसके अल्पकालिक और दूरगामी परिणाम देखे जाते हैं। टीएसओ पर अब तक ऐसा कोई प्रयोग किसी नतीजे तक नहीं पहुंचा है। न तो तेल कंपनियों की ओर से वक्त रहते ऐसी पहल की गई और न ही हिमाचल सरकार उन पर दबाव बनाने में कामयाब रही। हिमाचल से दोगुना सेब उगाने वाला जम्मू-कश्मीर भी इसमें असफल रहा है।

हिमाचल सरकार के अधिकारियों की मानें तो इस बार पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने ही इस छिड़काव की मंजूरी दी है। हिमाचल सरकार ने तो जेएंडके सरकार का अनुसरण किया है। कुछ कंपनियों ने सेब पर टीएसओ की स्प्रे का प्रयोग करने को केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड में पंजीकरण को आवेदन जरूर किए हैं, मगर अभी प्रमाणपत्र मिलने में वक्त लगेगा।

क्यों जरूरी है टीएसओ स्प्रे
हिमाचल और जेएंडके में ही नहीं बल्कि दुनिया भर के सेब उत्पादक क्षेत्रों में टीएसओ का स्प्रे होता है। सर्दियों के आखिरी पड़ाव में टीएसओ को पानी में मिलाकर सेब के पेड़-पौधों को शिखरों से लेकर जड़ों तक नहलाया जाता है। इससे सेब के पौधों में कई तरह के फंगस का संक्रमण नहीं होता। सेब के पौधे इसके बगैर तरोताजा नजर नहीं आते। यह छिड़काव हर साल किया जाता है। बागवानी विशेषज्ञ हर साल इस छिड़काव की संस्तुति करते आए हैं।

नहीं था कोई चारा
प्रधान सचिव बागवानी जेसी शर्मा ने बताया कि हिमाचल सरकार ने जम्मू-कश्मीर सरकार की तर्ज पर ट्री स्प्रे ऑयल का इस्तेमाल करने के लिए बागवानों को छूट दी है। इसके अलावा कोई चारा नहीं था। उन्होंने बताया कि इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम जैसी विश्वसनीय कंपनियों से ही तेल खरीदा जा सकेगा।

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